शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश सचिवालय की नई बनी एक्सटेंशन बिल्डिंग और मुख्यमंत्री के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने इस सुविधा को सरकार और जनता की सेवा के लिए बनी एक संस्थागत जगह बताया, न कि किसी एक व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए।
उद्घाटन के बाद मीडिया से बात करते हुए सुक्खू ने कहा कि नया कॉम्प्लेक्स तय समय सीमा के भीतर बनाया गया है और इससे मुख्यमंत्री के मौजूदा कार्यालय में जगह और पार्किंग की कमी की समस्या दूर होगी।
सुक्खू ने कहा, “मैं एक बात साफ करना चाहता हूं: यह मुख्यमंत्री का घर नहीं है; यह एक संस्था का घर है जहां मुख्यमंत्री आते हैं और अपनी बात रखते हैं। ऐसी संस्थाएं किसी एक व्यक्ति से जुड़ी नहीं होतीं। वे 50 साल या उससे ज़्यादा समय तक चलती हैं, और उस नज़रिए से, इस संस्था का निर्माण ज़रूरी था।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कार्यालय में जगह कम थी, जिसके कारण अलग-अलग गांवों से आने वाले लोगों, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को तंग जगहों पर इंतज़ार करना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि नई सुविधा में मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ-साथ प्रधान सचिव, अतिरिक्त निजी सचिव और उनके कर्मचारियों के कार्यालय भी हैं। विधायकों और उनसे मिलने आने वाले आम लोगों के लिए भी जगह दी गई है, साथ ही मुख्य सचिव और वित्त सचिव के कार्यालय भी हैं।
सुक्खू ने कहा कि इस इमारत में लगभग 40 गाड़ियों के लिए पार्किंग की सुविधा भी है, जिससे सचिवालय के मुख्य गेट के बाहर ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी।
उन्होंने कहा कि अभी सचिवालय के बाहर सड़क पर खड़ी होने वाली गाड़ियों को नई पार्किंग जगह पर शिफ्ट किया जाएगा, जिससे ज़्यादा खुली जगह मिलेगी और मुख्यमंत्री या मंत्रियों के आने-जाने के समय ट्रैफिक में रुकावट कम होगी।
सुक्खू के अनुसार, इस सुविधा में लगभग 15 कमरे हैं और इसे लगभग 20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजना अगले चरण में बगल की ज़मीन पर एक और ऑफिस बिल्डिंग बनाने की है ताकि मंत्री एक साथ बैठ सकें और सरकारी कामकाज ज़्यादा बेहतर ढंग से हो सके।
उन्होंने कहा, “यह पहला चरण था। मैं इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को बधाई देता हूं।” विपक्ष की इस आलोचना का जवाब देते हुए कि यह प्रोजेक्ट फ़िज़ूलखर्ची है, सुक्खू ने इस आरोप को खारिज कर दिया और कहा कि इस सुविधा का इस्तेमाल आने वाली सरकारें भी करेंगी।
सुक्खू ने कहा, “विपक्ष के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। वे इसे फ़िज़ूलखर्ची कहते हैं, जबकि उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये की बिल्डिंगें बनाई थीं। मैंने सिर्फ़ मुख्यमंत्री का ऑफिस बनाया है। अगर 15 या 20 साल बाद कोई मुख्यमंत्री आता है, चाहे वह विपक्ष का हो या किसी और का, तो वह इसी ऑफिस में बैठेगा। यह मेरा घर नहीं है।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद लोकतांत्रिक व्यवस्था की संस्थाएं हैं, ठीक वैसे ही जैसे न्यायपालिका और कार्यपालिका संस्थाएं हैं।
सुक्खू ने यह भी कहा कि पहले यह आलोचना की जाती थी कि ज़िला प्रशासन के पास मुख्यमंत्री के ऑफिस से बेहतर ऑफिस सुविधाएं हैं; उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नए कॉम्प्लेक्स का मकसद राज्य सरकार की संस्था के लिए सही इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराना है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका के बारे में पूछे जाने पर सुक्खू ने कहा कि कोर्ट जाना एक लोकतांत्रिक अधिकार है। “लोकतंत्र में जनहित याचिका दायर करना हर किसी का अधिकार है। लोगों को कोर्ट जाने, अधिकारियों, मंत्रिपरिषद के सदस्यों या मुख्यमंत्री से संपर्क करने का अधिकार है।”
अपनी मंत्रिपरिषद के बहुप्रतीक्षित विस्तार पर सुक्खू ने कहा कि यह जल्द ही होगा और संकेत दिया कि विभागों (पोर्टफोलियो) में भी बदलाव किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “हां, कैबिनेट का विस्तार जल्द ही होगा। इसमें कोई शक नहीं है। विभागों में भी बदलाव होंगे।”
किशाऊ मल्टी-पर्पज़ प्रोजेक्ट और बीजेपी के इस दावे पर कि इस समझौते का श्रेय केंद्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जाना चाहिए, सुक्खू ने कहा कि बातचीत संबंधित राज्यों और उनके अधिकारियों व मंत्रियों के बीच हुई थी।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री मोदी का कोई दखल नहीं था, और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने जय राम ठाकुर के नेतृत्व वाली पिछली बीजेपी सरकार के समय हुए समझौते को मानने से इनकार कर दिया था।
सुक्खू ने कहा, “जब हमारी सरकार सत्ता में आई, तो हमने जय राम ठाकुर द्वारा किए गए समझौते को मानने से इनकार कर दिया। हमारे कैबिनेट सदस्य इस बात पर एकमत थे कि हिमाचल के संसाधनों का दोहन नहीं होने दिया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई बैठकें हुई थीं, जिनमें चार बैठकें उनके साथ और एक बैठक डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ हुई थी।
सुक्खू ने कहा कि राज्य को एक प्रस्ताव भी मिला था जिसके तहत बिजली उत्पादन का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि हिमाचल प्रदेश को रॉयल्टी के तौर पर 12 प्रतिशत बिजली मुफ्त मिलेगी।
उन्होंने कहा, “हमने कहा कि हम इसे भी स्वीकार नहीं करेंगे।”
सुक्खू ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा सीधे अमित शाह के सामने उठाया था और सवाल किया था कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हितों के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “उत्तराखंड एक बराबर का साझेदार है। उत्तराखंड की मांग क्यों नहीं मानी गई? उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश के साथ जिस समझौते पर चर्चा हो रही है, उसे उत्तराखंड पर भी लागू किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं हो सका।”
उन्होंने आगे दावा किया कि अगर हिमाचल की पिछली सरकार सत्ता में बनी रहती, तो राज्य से जुड़ा समझौता उत्तराखंड की व्यवस्था जैसी शर्तों पर ही होता।
सुक्खू ने कहा कि 612 मेगावाट की किशाऊ परियोजना में बिजली उत्पादन के लिए अनुमानित निवेश लगभग 6,000-7,000 करोड़ रुपये होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के चालू होने के बाद हिमाचल प्रदेश को इससे मिलने वाला राजस्व काफी अधिक होगा।
उन्होंने कहा, “अगर आज बिजली से पैसा आना शुरू हो जाता, तो यह लगभग 600 करोड़ रुपये होता। लेकिन परियोजना पांच साल बाद पूरी होगी, और हिमाचल प्रदेश को लगभग 1,200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये मिलेंगे।”
मुख्यमंत्री ने बीजेपी नेताओं पर इस मुद्दे पर गुमराह करने वाले बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा, “चाहे जय राम जी हों या कोई अन्य नेता, वे सभी गलत बातें कह रहे हैं।”

