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डाडासीबा में SDM कार्यालय खुलने से दूर होगी समस्या

The SDM office will operate from the Kotla CHC : शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र को कई विकास योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने डाडासीबा में नया एसडीएम कार्यालय खोलने और कस्बा कोटला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे संचालित करने की घोषणा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने 1,012 मछुआरा परिवारों को 35 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी जारी की। उन्होंने कहा कि नए कार्यालय से संबंधित अधिसूचना शीघ्र जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कस्बा कोटला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को चौबीसों घंटे संचालित करने के लिए आवश्यक प्रावधान करने की भी घोषणा की। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज डाडासीबा में मुख्यमंत्री मत्स्य सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 1,012 मछुआरा परिवारों को वित्तीय सहायता जारी करने के उपरान्त एक विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए ये घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री मत्स्य सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 3,500 रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मछली पकड़ने पर लगाए जाने वाले वार्षिक प्रतिबंध की अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरा परिवार को 3,500 रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। मछुआरा समुदाय की समस्याओं और कठिनाइयों को समझने के उपरान्त ही इस समुदाय की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व किसी भी सरकार ने मछुआरा परिवारों के कल्याण के बारे में नहीं सोचा। शासन में वास्तविक बदलाव का अर्थ यही है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को राज्य के संसाधनों पर समान अधिकार मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से मछुआरा परिवार सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके अलावा, राज्य सरकार ने मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी प्रदान किया है। यदि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद नहीं किया गया होता तो हिमाचल प्रदेश वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बन सकता था। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रही थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसे बंद किए जाने के कारण राज्य को प्रति वर्ष लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है।
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