धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में जारी ड्राई स्पैल ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं,तो दूसरी तरफ सूखे के चलते पौंग झील में आने वाले विदेशी परिंदों की आमद में भी कमी आई है। यानी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला स्थित पौंग झील में इस वर्ष विदेशी परिंदों की चहचहाहट फीकी पड़ गई है। साइबेरिया और मध्य एशिया से हर साल सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में इस बार करीब 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि वन विभाग द्वारा अभी पक्षियों की आधिकारिक गणना पूरी नहीं की गई है, लेकिन प्रारंभिक आकलन ने पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार पक्षियों की संख्या में आई कमी का प्रमुख कारण इस वर्ष पड़ा ड्राई स्पेल यानी सूखा है। पौंग झील के आसपास के फीडिंग एरिया में पर्याप्त बारिश न होने से वह घास नहीं उग पाई,जो प्रवासी पक्षियों का मुख्य आहार होती है। भोजन की कमी के चलते पक्षियों ने झील के किनारों से दूरी बना ली और संभवत: अन्य सुरक्षित स्थलों की ओर रुख किया। सूखे के साथ-साथ बांध में जलस्तर का अधिक होना भी प्रवासी पक्षियों के लिए प्रतिकूल साबित हुआ है। आमतौर पर ये पक्षी उथले पानी और कीचड़ वाले दलदली इलाकों में रहना पसंद करते हैं।
जलस्तर सामान्य से अधिक रहने के कारण ऐसे क्षेत्र कम हो गए, जिससे पक्षियों के बैठने और चरने की जगह घट गई और उनकी संख्या पर सीधा असर पड़ा। बॉक्स: माइग्रेशन पैटर्न हो रहा प्रभावित जलवायु परिवर्तन का असर वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन भी पक्षियों के माइग्रेशन पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। मौसम में आए अनपेक्षित बदलाव,सर्दियों में देरी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण प्रवासी पक्षियों के आने के समय और मार्ग में परिवर्तन देखा गया है। इसका असर पौंग झील जैसे पारंपरिक और सुरक्षित ठिकानों पर भी साफ नजर आ रहा है।

