Trilok Seeks Transparency in Himachal’s Disaster Funds : शिमला। हिमाचल प्रदेश में आपदा पुनर्निर्माण के लिए जारी PDNA फंड के इस्तेमाल को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार से जवाब मांगा है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं विधायक त्रिलोक जमवाल ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर वास्तविक नुकसान के बिना टेंडर तैयार करने और पर्याप्त काम किए बिना बिलों का भुगतान करने की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 की आपदा के बाद हिमाचल के लिए ₹2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की थी, जिसमें लोक निर्माण विभाग के लिए ₹487.80 करोड़ निर्धारित किए गए। जमवाल ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बावजूद कई सड़कें बदहाल क्यों हैं। उन्होंने सरकार से सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में स्वीकृत राशि, टेंडर, ठेकेदारों और भुगतानों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट, भौतिक सत्यापन और विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी उठाई। ये अनियमितताओं के आरोप भाजपा नेता ने लगाए हैं; इनकी पुष्टि जांच से ही होगी।
उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार दूसरी किस्त में विभिन्न विभागों के लिए ₹753.29 करोड़ स्वीकृत हुए, जिसमें ₹564.97 करोड़ केंद्रीय और ₹188.32 करोड़ राज्य हिस्सा दर्शाया गया है। अकेले लोक निर्माण विभाग को ₹487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को ₹176.48 करोड़, कृषि विभाग को ₹29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को ₹18.22 करोड़ स्वीकृत किए गए। जमवाल ने सवाल किया कि जब सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई, तो आज भी अनेक सड़कें बदहाल क्यों हैं? जनता गड्ढों, टूटी सड़कों और बाधित यातायात से परेशान क्यों है? उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में 259 सड़कें अवरुद्ध होने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर में ठियोग और किन्नौर के पूह क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर भी यातायात बाधित हुआ।
त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश हैं कि PDNA का पैसा केवल 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त और स्वीकृत परिसंपत्तियों पर खर्च होगा। नियमों से बाहर खर्च की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित स्वीकृति अधिकारियों की होगी। ऐसे में सरकार बताए कि क्या प्रत्येक टेंडर से पहले वास्तविक नुकसान का सत्यापन किया गया? उन्होंने कहा कि आदेश में मार्च 2026 तक धनराशि उपयोग करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश थे। मुख्यमंत्री बताएं कि कितने कार्य पूरे हुए, कितने बिल पास हुए और कितने कार्यों की जांच हुई? जमवाल ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की शिकायतों को सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने मांग की कि सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों की स्वीकृत राशि, टेंडर, ठेकेदारों और भुगतान का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा, “आपदा पीड़ितों के पुनर्निर्माण का पैसा किसी के राजनीतिक संरक्षण या निजी लाभ का साधन नहीं बन सकता। जहां अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई हो।” जमवाल ने सभी संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट, भौतिक सत्यापन और PDNA फंड पर विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।

