शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू किए गए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पाठ्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। राज्य के 151 सरकारी स्कूलों में इस शैक्षणिक सत्र से यह पाठ्यक्त्रम लागू किए जाने के बाद विद्यार्थियों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ा है। मुयमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इन सभी स्कूलों में मेडिकल, नॉन-मेडिकल और वाणिज्य तीनों शैक्षणिक संकाय शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने को कहा है, ताकि विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। शिक्षा विभाग के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्त्रम लागू होने के बाद कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चंबा जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय किलाड़ में 90.24 प्रतिशत, मंडी जिले के जंजैहली में 90.43 प्रतिशत, किन्नौर के रिकांगपिओ में 50.50 प्रतिशत तथा शिमला जिले के नेरवा में 52.22 प्रतिशत तक नामांकन बढ़ा है।
इसके अलावा शिमला के घणाहट्टी में 26.27 प्रतिशत, लाहौल-स्पीति के काजा में 23.40 प्रतिशत, ठियोग में 16.19 प्रतिशत, सिरमौर के नौहराधार में 29.69 प्रतिशत और चोपल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 28.16 प्रतिशत तक विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। अन्य कई स्कूलों में भी प्रवेश की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
इसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में वर्ष 2021 में 21वें स्थान से उभरकर देश में पांचवें स्थान तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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