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तीर्थन घाटी में अनोखा मड हाउस, जहां पक्षियों के नाम से पहचाने जाते हैं कमरे

कुल्लूः हिमाचल प्रदेश में बढ़ते पर्यटकों की संख्या में अब ऐसे भी पर्यटक है जो यहां की वादियों में सिर्फ सुकून की तलाश और यहां के पर्यावरण को अनुभव करने आते है। ऐसे में अधिकतर पर्यटक जिला कुल्लू की तीर्थन घाटी का रुख करते है। यहां आने वाले पर्यटन न सिर्फ यहां सुकून से पल बिताते है बल्कि यहां की खूबसूरत वादियों में बर्ड वॉचिंग का भी आनंद लेने के लिए पहुंचते है।

ऐसे में यहां अब होटल और होम स्टे संचालकों के द्वारा भी पर्यटकों को पर्यावण से जोड़ने और यहां पाए जाने वाले वन्य जीवों के प्रति जानकारी भी दी जा रही है। बल्कि उन्हें ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में भी इन वन्य जीवों को दिखाने के लिए ले जाया जा रहा है।

ऐसे में तीर्थन घाटी में एक ऐसा भी मड हाउस मौजूद है जहां आने वाले पर्यटक यहां पर जाने वाले पक्षियों को अपनी खिड़की के बाहर देख सकते है। बल्कि उनके कमरों के नाम भी इस इलाके में पाए जाने वाले पक्षियों के नाम पर ही रखे गए है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक यहां के पक्षियों की प्रजातियों के बारे में अधिक जान सकें और पर्यावरण के प्रति भी जागरूक हो सके। तीर्थन घाटी के हा गांव में सनशाइन कॉटेज के संचालक अंकित सूद के द्वारा एक मड हाउस तैयार किया गया है। जहां पर कमरों के नाम नंबर से नहीं बल्कि पक्षियों के नाम से पहचाने जाते हैं।

जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी विश्व धरोहर ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क के भीतर आती है और नेशनल पार्क का नजारा लेने के लिए देश-विदेश से हर साल हजारों सैलानी यहां पहुंचते हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की अगर बात करें तो यहां पर 250 से भी अधिक पशुओं की प्रजातियां रहती है।

ऐसे में विभिन्न पक्षियों पर शोध करने के लिए भी यहां पर छात्र आते हैं और वर्ड वाचिंग के लिए भी हर साल ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में सैलानियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क के अंदर बात करें तो यहां पर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में जुजुराना, हिमालयन मोनाल, लैमर्जर, हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, गोल्डन ईगल, प्लम-हेडेड पैराकीट, क्रिमसन सनबर्ड और ग्रे-हुडेड वार्बलर जैसी सैकड़ो तरह की पक्षियों की प्रजाति पाई जाती है।

सन शाइन हिमालयन कॉटेज के संचालक प्रोफेसर अंकित सूद ने बताया कि साल 2017 में इसका निर्माण किया गया और इसमें पांच कमरे बनाए गए हैं। जो मिट्टी से बने हुए हैं। ऐसे में यह मड हाउस देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इन कमरों की खास बात यह है कि कमरों के बाहर कोई भी नंबर नहीं लिखा हुआ है। बल्कि हाथ से बनी हुई विभिन्न पक्षों की पेंटिंग कमरे के ऊपर रखी गई है और उन पक्षियों का नाम भी पेंटिंग में लिखा गया है। ऐसे में कोई सैलानी जब भी मड हाउस में रहने के लिए आता है तो उसे पक्षियों के नाम से ही कमरे दिए जाते हैं। अगर सैलानी को किसी प्रकार की वस्तु की आवश्यकता पड़ती है तो वह रिसेप्शन पर जब कॉल करता है। तो उसे अपने कमरे के बाहर पेंटिंग में लिखे हुए पक्षी का नाम ही बताना पड़ता है।

प्रोफेसर अंकित सूद ने बताया कि साल 2000 में उन्होंने कुल्लू कॉलेज में पर्यटन विभाग में नियुक्ति दी थी और साल 2012 में उन्होंने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। साल 2000 में उन्होंने सबसे पहले टूरिस्ट गाइड के तौर पर भी ट्रेनिंग ली थी और साल 2002 में होम स्टे संचालन के लिए भी ट्रेनिंग ली थी।

अपनी सेवा काल के दौरान भी उन्हें त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम जैसे राज्यों में काम करने का मौका मिला और कई बार इन राज्यों में पर्यटन को विकसित करने की दिशा में एडवाइजर के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं। ऐसे में साल 2012 से ही तो पर्यटन के कारोबार से जुड़े हुए हैं और अब वह ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क प्रबंधन के साथ मिलकर स्थानीय युवक मंडल, महिला मंडल को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।

प्रोफेसर अंकित सूद ने बताया कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क विश्व धरोहर है और यहां जीव जंतुओं की कई दुलर्भ प्रजातियां पाई जाती है। ऐसे में तीर्थंन घाटी को यूनाइटेड नेशन की बॉडी आईयूंसीएन (इंटरनेशन यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) के द्वारा भी इंपॉर्टेंट बर्ड एरिया के तौर पर चिन्हित किया गया है। भारत की अगर बात करे तो इम्पोर्ट बर्ड एरिया के तौर पर 500 जगह चिन्हित की गई है।

ऐसे में मडहाउस के कमरों के नाम पक्षियों पर रखने का विचार भी उन्हें इसी तरह से आया। इस मड हाउस में जो भी सैलानी ठहरने के लिए आता है। तो उन्हें विशेष रूप से यहां पाए जाने वाले पक्षियों की प्रजातियां की जानकारी दी जाती है और उन्हें पेंटिंग तथा विभिन्न किताबों के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है। साथ ही यहां के पारम्पारिक खान पान, त्यौहारों और घूमने के स्थानों की जानकारी देने के लिए भी यहां हर कमरे में एक गाइड बुक रखी गई है। ताकि यहां आने वाले पर्यटक इस घाटी में घूमने और इस जगह को जानने के लिए अपने हिसाब से प्लान कर सके।

उन्होंने बताया कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 250 से अधिक की प्रजाति पाई जाती है और एशिया मैगजीन में भी यहां की बर्ड की प्रजाति की जानकारी दी गई है। इतने सारे बर्ड जहां रहते हैं तो इसका मतलब होता है कि उस इलाका का पर्यावरण काफी बेहतर है।

प्रोफेसर अंकित सूद ने बताया कि मड हाउस में आने वाले सैलानियों को भी बर्ड वच के लिए ले जाते हैं। इससे पहले एक्सपर्ट बर्ड वाचर विदेश से आते थे और वो उनके साथ पार्क के भीतर बर्ड वाच में जाते थे।

इसके अलावा ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क प्रबंधन के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं को भी वर्ड वाचिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है और उसमें भी वह अपनी भूमिका निभाते हैं। वर्ड वाचिंग के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलता है और वह यहां पाई जाने विभिन्न पक्षियों के प्रजातियों के बारे में भी सैलानियों को अच्छी जानकारी दे पाते हैं।

📍 Location: Kullu (KULLU)

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