कुल्लू: देश भर में श्रावण मास के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ विभिन्न शिव मंदिर में जुट रही है तो वही भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों के द्वारा भगवान का विशेष पूजन अर्चन भी किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के भी सभी मंदिरों में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंच रहे है. जहां हर मंदिर की अपनी कोई खास मान्यता है. वहीं जिला कुल्लू के बजौरा में भी एक ऐसा मंदिर है जिसे आठवीं शताब्दी में बनाया गया है. मान्यता के अनुसार यह मंदिर पांडवों के द्वारा अज्ञातवास के दौरान बनाया गया था और सिर्फ एक पत्थर को ही काटकर इस पूरे मंदिर को तैयार किया गया है।
श्रावण मास में भी रोजाना सुबह और शाम श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंच रहे है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिमाचल से पांडवों का भी इतिहास जुड़ा हुआ है माना जाता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने अपना अज्ञातवास का लंबा समय हिमाचल के पहाड़ों में बिताया था और अपने अज्ञातवास के दौरान उन्होंने कई मंदिरो का भी निर्माण किया। जिनसे से एक मंदिर यह भी मौजूद है. भगवान शिव के इस मंदिर में उकेरी गई नक्काशी आज भी उत्कृष्ट कलाकारी को दर्शाती है। यह मंदिर अब भारतीय सर्वेक्षण एवं पुरातत्व विभाग के अधीन है। यह मंदिर इस क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं और यह मंदिर कुल्लू जिले के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है।
इस मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। मंदिर की आंतरिक और बाहरी दीवारों पर अद्भुत नक्काशी की गई है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर की अद्भुत नक्काशी देखकर चौंक जाते हैं। मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी स्थित है। जो विभिन्न देवताओं को समर्पित हैं। यहां हिंदू देवता भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, स्त्री शक्ति की अवतार माता दुर्गा और भगवान गणेश की लघु मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं। यहां पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासकर महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी श्रद्धालु भगवान शिव के दरबार में सच्चे मन से दर्शन करने के लिए आता है। उसकी हर सभी मनोकामनाएं जरूर पूर्ण होती हैं।
मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने पहुंची श्रद्धालु शिवांगी का कहना है कि उन्होंने इस मंदिर के बारे में काफी सुना था और आज वह अपने दोस्तों के साथ इस मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने के लिए आई है। मंदिर में काफी असीम शांति का उन्हें एहसास हुआ है और ऐसे में वह भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि वह परिवार के साथ-साथ सभी लोगों को सुख शांति प्रदान करें।
मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे पांगी के निवासी लक्ष्मी चंद ठाकुर का कहना है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है। यहां सावन माह और शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर का निर्माण नागर शैली में हुआ है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि पांडव जब अज्ञातवास पर हिमालय की यात्रा कर रहे थे। उस दौरान पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण किया है। वहीं, आसपास के इलाके में खुदाई करने पर भी यहां पर बड़ी-बड़ी शिलाएं मिली हैं। जिन्हें पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित कर लिया गया है।
महिला श्रद्धालु विमला ठाकुर का कहना है कि वह भी श्रावण मास के चलते भगवान शिव के दर्शनों के लिए आई है। इससे पहले उन्होंने बिजली महादेव का आशीर्वाद लिया और बजौरा में विश्वेश्वर महादेव के बारे में भी उन्होंने काफी लोगों से सुना था। ऐसे में आज उन्होंने यहां पर भगवान शिव का पूजन अर्चन किया है।
कुल्लू से आई महिला श्रद्धालु स्नेह लता का कहना है कि वह हर साल इस मंदिर में दर्शनों के लिए आते हैं। इस मंदिर की नक्काशी काफी अच्छी है और मंदिर में आकर उन्हें काफी शांति मिलती है। वह श्रावण मास के साथ-साथ शिवरात्रि के अवसर पर भी यहां भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंचती है। इसके अलावा जिला कुल्लू के साथ-साथ अन्य इलाकों से भी भारी संख्या में लोग यहां भगवान शिव के दर्शनों के लिए आते हैं।
कुल्लू से आई श्रद्धालु प्रदीप मोदगिल ने बताया कि मान्यता है कि यह मंदिर पांडवों के द्वारा तैयार किया गया है। ऐसे में आज भी लोगों की इस मंदिर के प्रति काफी श्रद्धा है इस मंदिर की देखरेख पुरातत्व विभाग के द्वारा की जाती है। ऐसे में यहां मंदिर में की गई बारीक नक्काशी को देखकर हर कोई हैरान होता है।
📍 Location: Kullu (KULLU)

