
शिमला : हिमाचल अब अपने पानी और बिजली से केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं करेगा, बल्कि अपने अधिकारों के जरिए प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की तैयारी में है। बीबीएमबी के बकाया बिजली हिस्से को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू संबंधित विभागों को शनिवार से ही बिजली का अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताओं को शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। इस पैसे का इस्तेमाल राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों को बेहतर बनाने और सरकारी कर्मचारियों के वित्तीय लाभों का समय पर भुगतान करने में किया जाएगा।
बीबीएमबी के बकाया बिजली हिस्से को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अगले 20 वर्षों में प्रदेश को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का राजस्व मिलने का दावा किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि इस बिजली को छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा जाए तो प्रदेश को तत्काल करीब 500 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार की कोशिश इस बिजली का अधिकतम मूल्य हासिल करने की है, जिससे सालाना आय करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सके।
दिल्ली दौरे से लौटने के बाद ओक ओवर में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हिमाचल अपने अधिकारों पर अब किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। हमारी इच्छाशक्ति बिकाऊ नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी का मामला वर्षों से लंबित था, लेकिन उनकी सरकार ने इसे केवल कानूनी विवाद मानकर नहीं छोड़ा, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई में सरकार किसी दबाव में नहीं झुकी। हिमाचल की जनता ने कांग्रेस की सिंगल इंजन सरकार को जिम्मेदारी दी और सरकार ने प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए अपना पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि प्रदेश में डबल इंजन सरकार होती तो संभवतः उत्तराखंड की तरह कमजोर समझौता करना पड़ता। उन्होंने भाजपा को नकारात्मक राजनीति छोड़कर प्रदेश के आर्थिक हितों में सरकार का साथ देने की चुनौती दी। सुक्खू ने कहा कि सरकार वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई का लाभ हिमाचल की जनता को मिलना चाहिए।
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