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भक्त की मदद के लिए थाने पहुंचे थे देवता अजयपाल

Why Did Devta Ajaypal Visit Kullu Police Station? : कुल्लू। दशहरा में आज भी सदियों पुरानी देव परंपराएं आस्था और कौतूहल का केंद्र बनी हुई हैं। रविवार को देवता अजयपाल ढोल-नगाड़ों की थाप पर अपने हरियानों के साथ कुल्लू पुलिस थाना पहुंचे। करीब 100 साल पुरानी मान्यता के अनुसार, देवता अपने भक्त खांपू की मदद के लिए थाने पहुंचे थे, जहां उसकी हथकड़ियां और बेड़ियां अपने आप टूट गई थीं। इसी घटना की याद में आज भी देवता हर साल थाना परिसर में विश्राम करने पहुंचते हैं।

इसके अलावा दशकों परंपराओं का आज भी देवी देवताओं के द्वारा निर्वाह किया जा रहा है। इसी कड़ी में देवता अजय पाल अपने हरियानो के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर पुलिस थाना कुल्लू पहुंचे। इस दौरान देवता के द्वारा पुलिस थाना पहुंचकर पुरानी परंपरा का निर्वाह किया गया। थोड़ी देर विश्राम करने के बाद देवता अजयपाल वापस अपने देवालय लौट आए। ऐसे में लोगों के बीच यह भी चर्चा चली रही कि आखिर देवता पुलिस थाना क्यों पहुंचे. देवता अजयपाल के पुजारी नूप राम ने बताया कि देवता अजयपाल को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

मान्यता है कि देवता अजयपाल सूखे और अकाल से निजात दिलाते हैं। इसलिए दशकों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए रविवार को देवता अपने देवलुओं के साथ थाना परिसर पहुंचे और वहां थोड़ी देर विश्राम करने के बाद भगवान रघुनाथ से मिलने के लिए रवाना हो गए। देवता अजयपाल के पुजारी नूप राम ने बताया कि यह बात करीब 100 साल पहले की है। जब अंग्रेजों के जमाने में देवता का एक कटियाला (भक्त) खांपू नाम का व्यक्ति हुआ करता था। जो देवता के भंडार के लिए ग्रामीण इलाकों से अनाज जमा करता था। खांपू के द्वारा उस दौरान किसी व्यक्ति की जमानत दी गई थी।

जब पुलिस उसे गिरफ्तार कर ला रही थी तो उसके हाथ में बंधी हुई एक हथकड़ी पहले टूट गई। जब वह कुल्लू पुलिस थाने में पहुंचा तो उस दौरान उसकी दूसरी बेड़ी भी टूट गई। तभी साथ चल रहे पुलिस वाले ने उससे पूछा कि खांपू तेरे पीछे कौन चल रहा है। लेकिन खांपू को पीछे कुछ भी दिखाई नहीं दिया। खांपू ने कहा कि उसके पीछे कोई नहीं चल रहा है. जबकि साथ चल रहे पुलिस वालों को उसके पीछे एक व्यक्ति लगातार चलता हुआ दिखाई दे रहा था। जो कि स्वयं देवता अजयपाल थे। देवता के पुजारी ने बताया कि जब दूसरी बेड़ी भी अपने आप टूट गई तो पुलिस वालों ने भी इसे चमत्कार माना और खांपू को छोड़ दिया।

जब खांपू वापस लौट रहा था तो उसे वही व्यक्ति मिला। जिसकी उसने जमानत ली थी और उसके चक्कर में उसे पुलिस वाले पकड़ कर ले गए थे.ल। ऐसे में खांपू ने उस व्यक्ति को पुलिस के हवाले किया और पुलिस वालों ने भी इस देवता का चमत्कार माना। देवता अपने भक्त खांपू के लिए उस दौरान कुल्लू थाना पहुंचे थे और वहां पर उन्होंने थोड़ी देर विश्राम किया था। उसी परंपरा का आज भी पालन किया जा रहा है।यही वजह है कि हर साल देवता कुल्लू थाना परिसर में थोड़ी देर विश्राम के लिए अवश्य पहुंचते हैं देवता अजयपाल कांगड़ा जिले के बीड़ भंगाल से अपनी पत्नी के साथ कुल्लू आए थे।

उन्होंने एक दिन कुल्लू के काइस धार में गुजारा लेकिन उन्हें यह स्थान उचित नहीं लगा। उसके बाद देवता अपनी पत्नी के साथ पीज पहुंचे और पीज से वह बागन गांव में बैठे। उस दौरान पूरे इलाके में सूखा पड़ा हुआ था और लोग भी काफी परेशान थे। देवता के वहां आने के बाद खूब बारिश हुई और लोगों की फसल भी काफी अच्छी हुई। उसके बाद देवता का यहां पर मंदिर बनाया बाइट -नूप राम, देवता अजयपाल के पुजारी।

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