
शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) से अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटीज, चमियाना में स्थानांतरित किए गए कर्मचारियों का वेतन रोके जाने के मामले पर कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को अपने वेतन के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कर्ण नंदा ने कहा कि प्रकाशित समाचार के अनुसार चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तैनात लगभग 30 नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों को सितंबर महीने का वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि अक्टूबर 2025 में उन्हें आईजीएमसी से चमियाना अस्पताल स्थानांतरित किया गया था और उनके स्थानांतरण आदेशों में शिफ्ट शब्द का प्रयोग किया गया था। इसके बावजूद अब प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण उनका वेतन प्रभावित हो रहा है।
नंदा ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है कि जिन कर्मचारियों को अस्पताल में मरीजों की सेवा के लिए तैनात किया गया, उन्हीं कर्मचारियों को प्रशासनिक आदेशों की अस्पष्टता के कारण वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारी, तकनीकी कर्मचारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की देखभाल तथा चिकित्सा सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इन्हीं कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो इसका असर कर्मचारियों के मनोबल और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
कर्ण नंदा ने कहा कि कर्मचारियों का वेतन कोई सरकारी कृपा नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्य का अधिकार है। कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण अथवा प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों में कोई प्रशासनिक समस्या है तो उसका समाधान सरकार और संबंधित विभागों को करना चाहिए। इसकी कीमत कर्मचारियों और उनके परिवारों को नहीं चुकानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से सवाल किया कि जब कर्मचारियों को विधिवत आदेशों के माध्यम से चमियाना अस्पताल भेजा गया था, तो अब उनके वेतन भुगतान में बाधा क्यों उत्पन्न हो रही है? क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है? क्या कर्मचारियों को स्थानांतरित करने से पहले वेतन भुगतान और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई थी?
नंदा ने कहा कि चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल राजधानी शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले गंभीर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। यहां कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और अन्य सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में कर्मचारियों की सेवा शर्तों और वेतन संबंधी विवादों का शीघ्र समाधान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल भवनों और घोषणाओं से नहीं होता, बल्कि अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी कर्मचारियों, दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की भी आवश्यकता होती है।
कर्ण नंदा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राजधानी शिमला की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी और चमियाना जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों में कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से मरीज बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर शिमला पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी, प्रशासनिक अनिश्चितता या चिकित्सा सेवाओं से संबंधित कोई भी समस्या सीधे आम जनता की चिंता का विषय बन जाती है।
नंदा ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासनिक निर्णयों के कारण किसी कर्मचारी का वेतन प्रभावित न हो तथा मरीजों को आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से मिलती रहें।
उन्होंने सरकार से मांग की कि चमियाना अस्पताल के प्रभावित कर्मचारियों का लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए, उनके स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए।
कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा स्वास्थ्य कर्मचारियों और मरीजों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और प्रभावित कर्मचारियों को राहत प्रदान करने की मांग की।
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