Site icon Dainik Savera Times

आईआईटी मंडी में लैंगिक संवेदनशीलता और POSH अधिनियम पर कार्यशाला, गरिमा व सम्मान की संस्कृति को मजबूत करने पर जोर

मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी की आंतरिक समिति द्वारा “लैंगिक संवेदनशीलता और POSH अधिनियम के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान के 850 से अधिक सदस्यों ने इसमें भाग लिया, जिनमें लगभग 122 संकाय सदस्य, 136 कर्मचारी और 600 पीएच.डी. शोधार्थी शामिल रहे।

कार्यशाला का आयोजन प्रो. नीतू कुमारी, पीठासीन अधिकारी, आंतरिक समिति के संयोजन में किया गया, जबकि डॉ. गीता रानी, सदस्य, आंतरिक समिति ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई।

यह कार्यक्रम आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मी धर बेहरा के निरंतर समर्थन और प्रोत्साहन को दर्शाता है। उनके नेतृत्व में संस्थान न केवल शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उत्कृष्टता को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है, बल्कि एक संवेदनशील, समावेशी, सम्मानजनक और जिम्मेदार संस्थागत संस्कृति के निर्माण पर भी जोर दे रहा है। उनकी दृष्टि और प्रोत्साहन से ऐसे प्रयासों को बल मिला है, जिनका उद्देश्य ऐसा कैंपस वातावरण तैयार करना है, जहां शैक्षणिक और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ गरिमा, संवेदनशीलता और आपसी सम्मान को भी महत्व दिया जाए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत किया गया और पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया गया। डीन एकेडमिक्स प्रो. वेंकटेश एच. चेंब्रोलू और डीन एसआरआईसी प्रो. श्याम कुमार मसकापल्ली ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए लैंगिक संवेदनशीलता पर आयोजित इस कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। डीन, एसोसिएट डीन, स्कूल अध्यक्ष, केंद्र प्रमुख, उप-कुलसचिव और सहायक कुलसचिव भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और सक्रिय रूप से शामिल हुए।

इनके साथ संकाय सदस्य, कर्मचारी, पीएच.डी. शोधार्थी और आंतरिक समिति के सदस्य भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे। संस्थान के विभिन्न स्तरों से हुई इस सामूहिक भागीदारी ने लैंगिक संवेदनशीलता और यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित जागरूकता को संस्थान द्वारा दिए जा रहे महत्व को दर्शाया।

कार्यशाला का संचालन डॉ. सुनीता एच. खुराना, सेंटर फॉर ट्रेनिंग, रिसर्च एंड एडवोकेसी (CenTRA) की संस्थापक निदेशक और भारत सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटेरिएट ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट (ISTM) की पूर्व निदेशक ने किया। सार्वजनिक प्रशासन, नीति और संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर डॉ. खुराना ने प्रतिभागियों को लैंगिक संवेदनशीलता और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम (POSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की अवधारणा, इसके विभिन्न आयाम और प्रकार, लैंगिक संवेदनशीलता एवं लैंगिक भेदभाव, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया तथा आंतरिक समिति द्वारा जांच करने के दिशा-निर्देश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। सत्रों में लैंगिक संवेदनशीलता और POSH अधिनियम से जुड़े केस स्टडी और भूमिका-अभिनय (Role Play) भी शामिल किए गए। इसके बाद प्रतिभागियों के साथ एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया।

केस स्टडी और भूमिका-अभिनय के माध्यम से सत्रों को व्यावहारिक और प्रभावी बनाया गया। इससे प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिली कि कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव और यौन उत्पीड़न से जुड़ी परिस्थितियां किस प्रकार उत्पन्न हो सकती हैं और संस्थागत एवं कानूनी ढांचे के तहत उनका उचित समाधान कैसे किया जाना चाहिए।

स्वागत संबोधन में प्रो. नीतू कुमारी, पीठासीन अधिकारी, आंतरिक समिति ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल POSH अधिनियम को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि समानता, समावेशिता और आपसी सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध संस्थान के रूप में आईआईटी मंडी यह मानता है कि शैक्षणिक और पेशेवर उत्कृष्टता केवल ऐसे वातावरण में विकसित हो सकती है, जो विश्वास, ईमानदारी और सम्मान पर आधारित हो। कार्यक्रम का समापन डॉ. गीता रानी, सदस्य, आंतरिक समिति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

850 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ यह कार्यशाला सुरक्षित और सम्मानजनक कैंपस वातावरण बनाए रखने के लिए जागरूकता, जवाबदेही और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में संस्थान की एक महत्वपूर्ण पहल रही।

यह कार्यक्रम आईआईटी मंडी द्वारा एक ऐसे संस्थान के निर्माण की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जो न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में मजबूत हो, बल्कि मानवीय मूल्यों और संस्थागत संस्कृति के स्तर पर भी उत्कृष्टता स्थापित करे। लैंगिक संवेदनशीलता कार्यशाला और गेटकीपर प्रशिक्षण जैसी पहलें एक ऐसे वातावरण के निर्माण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जहां समुदाय का प्रत्येक सदस्य स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, मूल्यवान और अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र महसूस करे।

“आईआईटी मंडी में संस्थागत उत्कृष्टता की परिकल्पना केवल इस बात से नहीं की जाती कि संस्थान क्या निर्माण करता है, बल्कि इस बात से भी की जाती है कि वह कैसी संस्कृति का निर्माण करता है—एक ऐसी संस्कृति, जो गरिमा, संवेदनशीलता, समावेशिता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान पर आधारित हो।”

📍 Location: मंडी (Mandi)

Exit mobile version