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हिमालय में पहले के अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक बर्फबारी हुई : अध्ययन

नई दिल्ली : एक नवीनतम अध्ययन में खुलासा हुआ है कि केवल सर्दी के एक मौसम में, हिमालय में हिमपात के उपलब्ध सबसे बेहतरीन विश्लेषण में भी हिमाचल प्रदेश के हम्प्टा झील इलाके में कुल मौसमी बर्फबारी का अनुमान त्रृटिपूर्ण था और यह 37 प्रतिशत कम था। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे, ब्रिटिश मौसम विज्ञान कार्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक हिमालय में बर्फबारी का आकलन सालों से गलत किया जा रहा था और यह उनका अध्ययन पश्चिम-मध्य हिमालय में बर्फबारी का बेहतर पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक बर्फबारी मीठे पानी का एक अहम स्रोत और जमीन पर मौजूद पानी का एक मुख्य हिस्सा है, लेकिन पहाड़ी इलाकों की बनावट में जटिलताओं के कारण इसे मापना मुश्किल होता है।
‘मंथली वैदर रिव्यू’ पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधान पत्र पश्चिमी-मध्य हिमालय और दूसरे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी पर नजर रखने के लिए ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद जमी हुई झीलों को प्राकृतिक दाब संवेदक के तौर पर इस्तेमाल करने के दौरान आने वाली मुश्किलों का भी समाधान करता है।

टीम ने अध्ययन के दौरान तीन झीलों पश्चिमी हिमालय में घेपन और हम्प्टा, और नेपाल में मुगु पर वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध जल दाब संवेदक लगाए। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के पर्वतीय जलवायु वैज्ञानिक और अनुसंधान पत्र के लेखक सिद्धार्थ गुंबर ने ‘द कन्वरसेशन’ के लिए लिखे एक लेख में बताया कि पारंपरिक उपकरणों के उलट, ये उपकरण बर्फबारी के समय और उसकी तीव्रता को मापने के लिए पूरी झील की सतह यानी हजारों से लेकर अरबों वर्ग मीटर के इलाके के संवेदकों को इस्तेमाल करते हैं।

गुंबर ने लिखा कि आर्किमिडीज़ के विस्थापन के सिद्धांत पर आधारित ये उपकरण झीलों में पानी के दबाव का इस्तेमाल करके जमा होने वाली बर्फ के द्रव्यमान को सीधे मापते हैं, जिससे ‘’बर्फबारी का सटीक और निष्पक्ष अनुमान’’ मिलता है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि यह मॉडल आम तौर पर बर्फबारी कब होती है और कितनी जमा होती है, दोनों का सटीक आकलन कर सकता है और विशेष तौर पर भारी बर्फबारी की घटनाओं को दर्ज करने के लिए बहुत उपयोगी है।

 

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