इंटरनेशनल डेस्क: मध्य पूर्व से एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने 49 दिनों बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला इजराइल और लेबनान के बीच हुए सीजफायर (संघर्ष-विराम) के बाद लिया गया है।
मामला क्या था?
28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई। कुछ दिनों बाद ईरान ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। अब 17 अप्रैल 2026 को, यानी 49 दिन बाद, इसे फिर से खोल दिया गया है।
In line with the ceasefire in Lebanon, the passage for all commercial vessels through Strait of Hormuz is declared completely open for the remaining period of ceasefire, on the coordinated route as already announced by Ports and Maritime Organisation of the Islamic Rep. of Iran.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 17, 2026
ईरान का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, सभी कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों के लिए रास्ता खोल दिया गया है। यह फैसला फिलहाल संघर्ष-विराम की अवधि तक लागू रहेगा। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि लेबनान में सीज़फ़ायर के हिसाब से, होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर सभी कमर्शियल जहाजों का रास्ता सीज़फ़ायर के बाकी समय के लिए पूरी तरह से खुला कर दिया गया है, और यह रास्ता उसी कोऑर्डिनेटेड रूट पर होगा जैसा कि ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन ने पहले ही बताया है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस फैसले की पुष्टि की और कहा कि अब सभी तरह के जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20-21% यहीं से गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस रास्ते से भेजा जाता है। LNG (प्राकृतिक गैस) का भी बड़ा हिस्सा यहीं से जाता है।
भारत पर असर
इस मार्ग के बंद होने से भारत को भी परेशानी हुई, रसोई गैस (LPG) की सप्लाई प्रभावित हुई। कतर और खाड़ी देशों से आने वाली गैस में दिक्कत आई। भारत को दूसरे देशों से गैस खरीदनी पड़ी। कुछ जहाजों को नौसेना की निगरानी में लाना पड़ा।
अब क्या असर दिखेगा?
होर्मुज खुलने के बाद तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने लगेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम हो रही हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
आगे क्या?
हालांकि रास्ता अभी सिर्फ संघर्ष-विराम की अवधि तक ही खोला गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह शांति बनी रहती है और संयुक्त राज्य अमेरिका आगे क्या कदम उठाता है। यह घटनाक्रम पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।