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GST काउंसिल में कैसे होते हैं फैसले? जानिए केंद्र और राज्यों की भूमिका

नई दिल्ली: भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) को लागू हुए अब कई साल बीत चुके हैं, लेकिन टैक्स व्यवस्था को लेकर सुधार की जरूरत आज भी महसूस की जा रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में GST काउंसिल की 56वीं बैठक 4 और 5 सितंबर को आयोजित की जा रही है। यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें टैक्स स्लैब को सरल बनाने, GST दरों में बदलाव और टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने पर मंथन होगा।

लेकिन सवाल यह है कि GST काउंसिल आखिर काम कैसे करती है? इसमें फैसले कैसे लिए जाते हैं और केंद्र व राज्यों की भूमिका क्या होती है? आइए समझते हैं इस पूरे सिस्टम को सरल भाषा में।

-GST काउंसिल: क्या है और कौन हैं इसके सदस्य?

GST काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित किया गया है। यह देश की वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली से जुड़ी नीतियों और नियमों को तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है।

काउंसिल की अध्यक्षता केंद्र सरकार के वित्त मंत्री करते हैं। इसके अलावा केंद्र से एक और मंत्री (अमूमन वित्त राज्य मंत्री) और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री या नामित प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं।

-फिलहाल काउंसिल में कुल 33 सदस्य हैं:

2 सदस्य केंद्र सरकार से 31 सदस्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से है।

-GST काउंसिल में फैसले कैसे होते हैं?

GST काउंसिल में अधिकांश फैसले आम सहमति से किए जाते हैं। लेकिन यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो वोटिंग के जरिए निर्णय लिया जाता है। इस वोटिंग सिस्टम को बेहद संतुलित और लोकतांत्रिक तरीके से डिजाइन किया गया है ताकि न तो केंद्र और न ही राज्य अपने दम पर कोई फैसला थोप सकें।

-वोटिंग स्ट्रक्चर:

केंद्र सरकार के पास कुल वोटिंग वेट का 33.33% हिस्सा होता है।

सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मिलकर 66.67% वोटिंग वेट साझा करते हैं। यानी, हर राज्य या यूटी का वेट लगभग 2.15% होता है।

-फैसला पास होने के लिए क्या जरूरी है?

किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए कम से कम 75% वोटों का समर्थन अनिवार्य है।

केंद्र (33.33%) अकेले कोई प्रस्ताव पास नहीं करा सकता

उसे कम से कम 20-21 राज्यों का समर्थन चाहिए (कुल मिलाकर 75% वेट)

उसी तरह, यदि केंद्र किसी प्रस्ताव का विरोध करता है, तो राज्यों को प्रस्ताव पास कराने के लिए लगभग 27-28 राज्यों का समर्थन जुटाना पड़ेगा, जो काफी मुश्किल होता है।

-काउंसिल के अधिकार क्या हैं?

कौन-सी वस्तु या सेवा किस स्लैब में आएगी

टैक्स की दरें बढ़ानी या घटानी

राज्यों को मुआवजा देना

टैक्स चोरी रोकने के उपाय

इनवॉइसिंग और कंप्लायंस से जुड़े नियम बनाना

हालांकि, GST काउंसिल के फैसले बाध्यकारी नहीं होते, यानी कोई राज्य चाहे तो किसी फैसले को अपने राज्य में लागू न करने का निर्णय ले सकता है।

GST Council
GST Council

-GST काउंसिल को लेकर राज्यों की क्या शिकायतें हैं?

कई राज्य विशेषकर विपक्ष शासित GST काउंसिल की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं:

बड़े राज्यों का तर्क है कि हर राज्य को बराबर वोटिंग वेट देने से छोटे राज्यों को उतना ही अधिकार मिल जाता है, जबकि उनकी अर्थव्यवस्था और टैक्स कलेक्शन बहुत कम होता है।

कुछ राज्यों का आरोप है कि GST की वजह से उनके रेवेन्यू में गिरावट आई है और केंद्र समय पर मुआवजा नहीं देता।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य कई बार परिषद के फैसलों से असहमति जताते रहे हैं और कुछ निर्णयों को लागू नहीं किया है।

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