नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने शनिवार को कथित तौर पर बाबरी मस्जिद बनाने का शिलान्यास (नींव रखने का काम) किया। यह कार्यक्रम बेहद विवादित रहा और राजनीतिक माहौल अचानक गरम हो गया।
हुमायूं कबीर का कहना है कि बंगाल की बड़ी मुस्लिम आबादी किसी भी कीमत पर यह मस्जिद बनाएगी और कोई एक ईंट भी नहीं हिला सकता। उन्होंने कहा कि मस्जिद बनाना उनका संवैधानिक अधिकार है, जैसे मंदिर और चर्च बनाने का अधिकार है।
कबीर ने अपने बयान में कहा, “भारत का संविधान किसी भी व्यक्ति को पूजा स्थल बनाने की अनुमति देता है।” कबीर ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि बाबरी मस्जिद गिराई गई थी और हिंदुओं की भावनाओं को देखते हुए अयोध्या में मंदिर बनाने की मंजूरी दी गई। तो हम मस्जिद क्यों नहीं बना सकते?” कानूनी केस मुझे नहीं रोक सकते। अल्लाह जिसके साथ है, उसे कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद में रहने वाले 4 करोड़ मुसलमानों को मस्जिद बनाने का अधिकार है। कबीर ने दावा किया है कि उन्हें कई धमकियाँ मिल रही हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का नाम भी उन्होंने लिया। उन्होंने चुनौती दी, “हिम्मत है तो कोई मुर्शिदाबाद आकर देख ले।”
हुमायूं कबीर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट केवल मस्जिद तक सीमित नहीं है। इसमें एक बड़ा हॉस्पिटल, गेस्टहाउस, और मीटिंग हॉल भी शामिल होगा। कबीर ने कहा, “मुसलमानों का वादा है, बाबरी मस्जिद बनेगी, बनेगी, बनेगी।”
इस पूरे मामले में बीजेपी ने सीधे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। बीजेपी का कहना है कि ममता बनर्जी जानबूझकर राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने दे रही हैं। उन्होंने हुमायूं कबीर को ऐसे विवादित कदम उठाने की मौन अनुमति दी है। बीजेपी ने यह भी सवाल उठाया कि कबीर को पहले क्यों नहीं सस्पेंड किया गया, जब उन्होंने कहा था कि जिले में 70% मुसलमान और 30% हिंदू रहते हैं? पार्टी का आरोप है कि यह मस्जिद निर्माण धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। इससे राज्य की कानून-व्यवस्था खराब हो सकती है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...