Last Updated: November 6, 2026

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अवैधता पाई गई तो बिहार में एसआईआर को रद्द कर देंगे : सुप्रीम कोर्ट

September 16, 2025

अवैधता पाई गई तो बिहार में एसआईआर को रद्द कर देंगे : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह यह मानता है कि भारत का निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक प्राधिकार होने के नाते बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कानून का पालन कर रहा है। इसने यह भी आगाह किया कि किसी भी अवैधता की स्थिति में इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार एसआईआर की वैधता पर अंतिम दलीलें सुनने के लिए 7 अक्तूबर की तारीख तय की और इस कवायद पर ‘टुकड़ों में राय’ देने से इंकार कर दिया।

पीठ ने कहा, ‘बिहार एसआईआर में हमारा फैसला पूरे भारत में एसआईआर के लिए लागू होगा।’ इसने स्पष्ट किया कि वह निर्वाचन आयोग को देश भर में मतदाता सूची में संशोधन के लिए इसी तरह की प्रक्रिया करने से नहीं रोक सकती। हालांकि, पीठ ने बिहार एसआईआर कवायद के खिलाफ याचिका दायर करने वालों को 7 अक्तूबर को अखिल भारतीय एसआईआर पर भी दलील रखने की अनुमति दी। शीर्ष कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से मामले के निर्णय पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाले याचिकाकत्र्ताओं से कहा, ‘मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से हमें क्या फर्क पड़ेगा? अगर हमें लगा कि इसमें कुछ अवैधता है, तो हम इसे रद्द कर सकते हैं।’ इस बीच, कोर्ट ने 8 सितंबर के शीर्ष कोर्ट के उस आदेश को वापस लेने का आग्रह करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें निर्वाचन आयोग को बिहार एसआईआर में 12वें निर्धारित दस्तावेज के रूप में आधार कार्ड को शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

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