Immediately Complete Important Tasks : परिवार के किसी सदस्य के निधन का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसे कठिन समय में ना चाहकर भी कुछ जरूरी वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। कई बार लोग भावनात्मक सदमे के कारण बैंक खाते, बीमा पॉलिसी, निवेश, पैन कार्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों से जुड़े जरूरी काम समय पर नहीं कर पाते, जिससे बाद में दावों के निपटारे, संपत्ति के हस्तांतरण या कानूनी प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है।
ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद कौन-कौन से वित्तीय रिकॉर्ड अपडेट या बंद कराने चाहिए। आइए जानते हैं वे 10 जरूरी काम, जिन्हें समय रहते पूरा करना आपके परिवार को भविष्य की परेशानियों और धोखाधड़ी के जोखिम से बचा सकता है।
किसी भी कानूनी या वित्तीय प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण दस्तावेज है। परिवार के सदस्य की मृत्यु के तुरंत बाद स्थानीय नगर निगम, ग्राम पंचायत या संबंधित सरकारी प्राधिकरण से इसे प्राप्त करना आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके बिना आगे की कोई भी प्रक्रिया संभव नहीं है।
आज के समय में आधार कार्ड लगभग हर सरकारी योजना, बैंक खाते और पहचान से जुड़ा हुआ है। यूआईडीएआई (UIDAI) भी समय-समय पर यह सलाह देता है कि मृत व्यक्ति के आधार नंबर का दुरुपयोग रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए। अगर यह पहचान पत्र एक्टिव रहता है, तो इसके डेटा के गलत इस्तेमाल या फ्रॉड की आशंका हमेशा बनी रहती है।
यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई बैंक खाता, निवेश या इनकम टैक्स रिकॉर्ड मौजूद है, तो उनके पैन कार्ड से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए. कानूनी उत्तराधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आयकर विभाग (Income Tax Department) में मृत व्यक्ति का कोई टैक्स बकाया न हो। सभी पेंडिंग रिटर्न दाखिल करने के बाद पैन कार्ड को सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
मृत व्यक्ति के सभी बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) की जानकारी जुटाना बेहद आवश्यक है. संबंधित बैंक शाखा में मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनी के दस्तावेज जमा करके खाते को बंद करने या बची हुई रकम को नॉमिनी/कानूनी उत्तराधिकारी के खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
अगर उस व्यक्ति के नाम पर कोई जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा या दुर्घटना बीमा पॉलिसी थी, तो परिवार को बिना देरी किए बीमा कंपनी से संपर्क करना चाहिए। याद रखें कि कई कंपनियों में क्लेम दर्ज करने की एक निश्चित समय-सीमा होती है, इसलिए इस काम में देरी करने से आपका क्लेम खारिज भी हो सकता है।
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, पीपीएफ (PPF) और एनपीएस (NPS) जैसे निवेशों की जानकारी एकत्र करें। यदि खातों में नॉमिनी का नाम दर्ज है, तो आवश्यक दस्तावेज जमा करके इन निवेशों को उत्तराधिकारी के नाम पर आसानी से ट्रांसफर कराया जा सकता है।
आजकल लगभग सभी वित्तीय ट्रांजैक्शन और बैंकिंग सेवाएं मोबाइल नंबर और ईमेल से जुड़ी होती हैं। ओटीपी आधारित किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए मृत व्यक्ति के मोबाइल कनेक्शन को सुरक्षित तरीके से बंद कराएं या उसे अपने नियंत्रण में लें। इसी तरह उनके ईमेल अकाउंट्स को भी सुरक्षित रूप से प्रबंधित या निष्क्रिय करना जरूरी है।
यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई दोपहिया या चारपहिया वाहन रजिस्टर्ड है, तो क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के नियमों के अनुसार वाहन का मालिकाना हक उत्तराधिकारी के नाम ट्रांसफर करवाना चाहिए. इसके साथ ही उनके ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड को भी अपडेट कराना आवश्यक है।
एलपीजी गैस कनेक्शन, बिजली का मीटर, पानी का कनेक्शन और अन्य घरेलू उपयोगिता सेवाओं को भी समय रहते परिवार के जीवित सदस्य या उत्तराधिकारी के नाम पर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में बिल भुगतान या मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद नहीं होता है।
यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई मकान, दुकान, जमीन या अन्य अचल संपत्ति है, तो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या वसीयत (यदि उपलब्ध हो) की मदद से स्वामित्व परिवर्तन यानी म्यूटेशन की कानूनी प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू कर देनी चाहिए, जिससे कि भविष्य में संपत्ति से जुड़े दावों में कोई दिक्कत न आए।
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