Last Updated: October 6, 2026

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कतर से 47% गैस आयात करता है भारत, LNG प्लांट पर हमले के बाद जानें इसका देश पर क्या पड़ेगा असर

March 19, 2026

कतर से 47% गैस आयात करता है भारत, LNG प्लांट पर हमले के बाद जानें इसका देश पर क्या पड़ेगा असर

नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव अब ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। पहले जहां ईरान केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा था। वहीं अब उसने तेल और गैस से जुड़े अहम ढांचों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। हाल ही में कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित एक बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद वहां आग लग गई और उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। यह हमला ऐसे समय पर हुआ, जब इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया था।

इसके बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को चेतावनी दी कि उनके ऊर्जा ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं। कतर दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर देशों में गिना जाता है। ऐसे में वहां के गैस प्लांट पर हमला होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है। वहीं इससे भारत की गैस सप्लाई और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी कुल गैस जरूरत का 47% कतर से ही आयात करता है। हर साल भारत करीब 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें से लगभग 12 से 13 मिलियन टन कतर से आता है। इसके अलावा भारत संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका से भी गैस मंगाता है।

अगर कतर में गैस उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत को अन्य देशों से ज्यादा कीमत पर गैस खरीदनी पड़ सकती है। इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय है, क्योंकि रसोई गैस यानी LPG के दाम बढ़ सकते हैं। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बन रहा है।

हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में गैस की कोई कमी नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन जिस तरह से मिडिल ईस्ट में हमले बढ़ रहे हैं, उससे यह साफ है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर गहराई से पड़ सकता है।

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