MSP on Crops : किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने किसानों की फसल की खरीद के बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोत्तरी को निर्थक बताते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ की 16 फसलों का MSP घोषित कर उसकी बढ़ोतरी का ढोल बजाना दिखावा मात्र है। रामपाल ने अपने बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मूल्य सूचकांक से संयोजन नहीं होने के कारण MSP में बढ़ोतरी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से भी कम है जबकि डा एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग की अनुशंसा के अनुसार किसानों की आय की बढ़ोतरी सिविल कर्मचारियों के समान होनी चाहिए वहीं दाने दाने की खरीद नहीं होने से न्यूनतम समर्थन मूल्य की सार्थकता पर प्रश्न चिह्न् लगा हुआ है।
उन्होंने कहा कि तिलहन, दलहनों में मूंग, मूंगफली, सोयाबीन जैसी उपजों में उत्पादन में से 25 प्रतिशत से अधिक खरीद नहीं करने जैसे प्रतिबंध लगे हुए है। इसके कारण कुल उत्पादन में से 75 प्रतिशत उत्पादन को तो खरीद की परिधि से ही बाहर धकेला हुआ है। इसी प्रकार मोटे अनाजों की खरीद राज्य सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली या अन्य कल्याणकारी योजनाओं में वितरण की सीमा से अधिक नहीं खरीदने जैसे प्रतिबंध भी थोपे हुए हैं।
रामपाल जाट ने कहा कि इससे मोटे अनाजों की खरीद ही नहीं हो पाती है। जैसे बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक राजस्थान होते हुए भी वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 में नगण्य खरीद हुई थी। उसके उपरांत तो एक दाने की भी खरीद नहीं हुई। खरीद के बिना एमएसपी में बढ़ोतरी निर्थक है। उसके उपरांत भी सरकार बढ़ोतरी के लिए ढोल पीट कर किसानों में भ्रम उत्पन्न करने का असफल प्रयास कर रही है। केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ की 16 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उसकी बढ़ोतरी का ढोल बजाना दिखावा मात्र है।

