Last Updated: September 21, 2026

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पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत हर संभव सहयोग देने को तैयार : PM Modi

May 16, 2026

पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत हर संभव सहयोग देने को तैयार : PM Modi

अबु धाबी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ शुक्रवार को बातचीत की और कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। इस दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए। मोदी ने कहा कि यूएई ने भारत में 5 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है।

प्रधानमंत्री और अल नाहयान की मुलाकात मोदी के 5 देशों के दौरे के पहले चरण में यूएई पहुंचने के तत्काल बाद हुई। मोदी यूएई में लगभग ढाई घंटा ठहरे और उसके बाद नीदरलैंड के लिए रवाना हो गए। यूएई के नेता के साथ बैठक की शुरुआत में मोदी ने कहा, हम यूएई पर हुए हमलों की निंदा करते हैं। ईरान और अमरीकी-इसराइल युद्ध के दौरान यूएई ईरानी हमलों का शिकार हुआ है। यहां अमरीका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है। मोदी ने कहा, यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह अस्वीकार्य है लेकिन यूएई ने जिस तरह से संयम रखते हुए मौजूदा स्थिति को संभाला है वह प्रशंसनीय है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम एशियाई संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने कहा, भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग करने को तैयार है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि इंडियन स्ट्रेटेजिक पैट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (देश के सामरिक पैट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी के साथ ‘सामरिक सहयोग’ के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसका लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, भारत के पैट्रोलियम भंडार को बढ़ाने और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरल पैट्रोलियम गैस (एलपीजी) भंडारण केन्द्रों पर सहयोग करना है। दोनों नेताओं ने एलपीजी में ‘रणनीतिक सहयोग’ समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली खाना पकाने की गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा साझेदारी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूएई ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने, नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि चौथा समझौता गुजरात के वडीनार में एक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने और बंदरगाहों और तटीय बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने से संबंधित है, जबकि 5वां समझौता जहाज मुरम्मत में कौशल विकास की व्यवस्था से संबंधित है। इसने कहा कि छठा समझौता भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंप्यूटर का एक समूह स्थापित करने से संबंधित है और 7वां समझौता मजबूत बाजार और अधिक रोजगार सृजित करने के लिए 5 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है।

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