नई दिल्ली [भारत]: भारत ने मानवीय सहायता के तौर पर बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की एक खेप भेजी है। इसका मकसद कमज़ोर समुदायों और अपने ही देश में विस्थापित लोगों की खाद्य सुरक्षा में मदद करना है।
बुधवार को X पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह कदम ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए एक भरोसेमंद विकास और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत (HADR) साझेदार के तौर पर भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।
भारत और बुर्किना फासो के बीच सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त नोट में बताया कि बुर्किना फासो भारत के साथ अपनी दोस्ती को बहुत महत्व देता है। बुर्किना फासो ने 1996 में नई दिल्ली में अपना स्थायी मिशन स्थापित किया और 2011 में इसे राजदूत स्तर तक उन्नत किया। भारत ने नवंबर 1996 से जुलाई 2002 में बंद होने तक, ओआगाडौगौ में अपना स्थायी मिशन बनाए रखा। भारत ने मार्च 2019 में ओआगाडौगौ में अपना स्थायी मिशन फिर से खोल दिया।
India has sent a consignment of 1000 metric tons of rice to Burkina Faso as humanitarian assistance. This is aimed at supporting food security for vulnerable communities and internally displaced persons.
The gesture reflects India’s continued commitment as a reliable… pic.twitter.com/Xx8CIHia5D
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 1, 2026
भारत और बुर्किना फासो नियमित राजनीतिक संवाद और परामर्श के माध्यम से राजनयिक संबंध बनाए रखते हैं।
इससे पहले नवंबर में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुर्किना फासो की संक्रमणकालीन विधायी सभा के अध्यक्ष उस्मान बुगौमा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बढ़ती विकास-उन्मुख साझेदारी पर चर्चा की।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय संसद विधायी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ‘डिजिटल संसद’ का किस तरह उपयोग कर रही है।
ओम बिरला ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “बुर्किना फासो की संक्रमणकालीन विधायी सभा के अध्यक्ष श्री उस्मान बुगौमा और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भारत की संसद में स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। हमने अपने देशों के बीच गर्मजोशी भरे और मैत्रीपूर्ण संबंधों, तथा बढ़ती विकास-उन्मुख साझेदारी पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जो हमारे द्विपक्षीय सहयोग में लगातार नए आयाम जोड़ रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय संसद विधायी कामकाज में पारदर्शिता, दक्षता और तकनीकी प्रगति को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ‘डिजिटल संसद’ का किस तरह उपयोग कर रही है।”
“मैंने ‘PRIDE’ द्वारा आयोजित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम में उनकी भागीदारी की सराहना की और भविष्य में विशेष रूप से तैयार किए गए (कस्टमाइज्ड) प्रशिक्षण मॉड्यूल आयोजित करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की,” उन्होंने जोड़ा।
लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें बुर्किना फासो के विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भारत के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।
दोनों पक्षों की ओर से उच्च-स्तरीय दौरों का आदान-प्रदान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
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