
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष क्षेत्र का समर्थन करता है। उन्होंने कहा,”अंतरिक्ष की संभावनाएं असीमित हैं और हमारी जिम्मेदारी सामूहिक है।” पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए मोदी ने फ्रांस और अन्य देशों से भारत के अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष अनुसंधान में ”सहयात्री” बनने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ”हम अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित सुरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष क्षेत्र का समर्थन करते हैं। वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग ईमानदारी के साथ एक साझा लक्ष्य की पूर्ति के लिए होना चाहिए। भारत की अंतरिक्ष यात्रा इसी सोच को दर्शाती है।”
#WATCH पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम सुरक्षित, सुदृढ़, शांतिपूर्ण और सतत अंतरिक्ष क्षेत्र सुनिश्चित करना चाहते हैं जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संवादों और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित हो।” pic.twitter.com/17eeFvktu5
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 10, 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना पर आधारित है और यही भावना पृथ्वी से आगे अंतरिक्ष तक भी पहुंचनी चाहिए। मोदी ने कहा कि सदियों से अंतरिक्ष ने लोगों की कल्पनाओं को प्रेरित किया है और अब यह पृथ्वी पर जीवन बचाने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा, ”अंतरिक्ष की संभावनाएं असीमित हैं। हमारी जिम्मेदारी सामूहिक है।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की प्रौद्योगिकी और साझेदारियां न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए उपयोगी हैं।
मोदी ने कहा, ”दुनिया के इस भरोसे के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियर और तकनीशियन की कई पीढ़ियों की लगन और कड़ी मेहनत है। दिन-रात काम करते हुए उन्होंने इसरो की प्रतिष्ठा स्थापित की है।”
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