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वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत, हो सकती है 5,800 करोड़ रुपये की डील

BrahMos missile

BrahMos missile

नेशनल डेस्क: भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग एक नए स्तर पर पहुंचने वाला है। खबर है कि सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को लेकर दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता जल्द हो सकता है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 5,800 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम 5 से 7 मई तक भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति के साथ वियतनाम के कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। यह दल मुंबई में भारतीय कंपनियों के साथ आर्थिक साझेदारी और निवेश के अवसरों पर बातचीत करेगा। इसके अलावा वियतनाम का प्रतिनिधिमंडल बोधगया भी जाएगा, जो सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है।

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10 साल की रणनीतिक साझेदारी

यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के 10 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है। इस साझेदारी की शुरुआत साल 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान हुई थी। तब से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।

तो लाम की बढ़ती ताकत

तो लाम वियतनाम की राजनीति में बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वह इस समय देश के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं। उनका भारत दौरा यह संकेत देता है कि वियतनाम अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है।

क्यों खास है ब्रह्मोस मिसाइल?

प्रस्तावित समझौते में ब्रह्मोस मिसाइल का तट से जहाजों पर हमला करने वाला संस्करण शामिल है। यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के जहाजों को तेजी से निशाना बना सकती है। ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया है और इसे दुनिया की तेज़तम क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। अगर यह सौदा होता है, तो इससे वियतनाम की दक्षिण चीन सागर में रक्षा क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी, जहां क्षेत्रीय तनाव पहले से बना हुआ है।

क्षेत्रीय संतुलन में भारत की भूमिका

भारत पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेच चुका है, जो इस मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार बना। इसके अलावा इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह का समझौता हुआ है, जिसमें इन मिसाइलों को उसके युद्धपोतों पर तैनात किया जाएगा। अब अगर वियतनाम भी इस सूची में शामिल होता है, तो दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी और मजबूत हो जाएगी। इससे चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव के बीच क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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