बेंगलुरु : चीफ ऑफ डिफैंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने वीरवार को कहा कि देश परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत परमाणु साए के बीच भी पारंपरिक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे भारत के दृष्टिकोण में एक ‘न्यू नॉर्मल’ बताते हुए जनरल चौहान ने कहा कि देश के संकल्प को उच्चतम स्तर पर स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी को याद किया कि भारत परमाणु खतरों से नहीं डरेगा।
उन्होंने कहा, हमें हमले के बाद के वातावरण में भी अभियान चलाने के लिए तैयार रहना चाहिए। पारंपरिक और परमाणु क्षेत्रों के बीच का संबंध अब मजबूती से स्थापित हो गया है। जनरल चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु हथियार युद्ध लड़ने के बजाय निवारण (डिटेरेंस) के साधन हैं। उन्होंने कहा, निवारण एक दिमागी खेल है। परमाणु हथियार अपने आप में कोई क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि ये दिमागी खेल का हिस्सा हैं, जो निर्णयों और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने पारंपरिक सैन्य योजना पर इनके महत्वपूर्ण प्रभाव को भी स्वीकार किया। जनरल चौहान ने कहा कि भारत पारंपरिक सीमाओं से परे होने वाले संघर्षों के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है। युद्ध की बदलती प्रकृति पर चर्चा करते हुए उन्होंने ने कहा कि सैन्य और नागरिक भूमिकाओं के बीच का अंतर तेजी से कम हो रहा है। अंतरिक्ष, साइबर, आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और सूचना युद्ध जैसे क्षेत्रों में भविष्य के संघर्षों के लिए एक हाइब्रिड संरचना की आवश्यकता होगी, जो सशस्त्र बलों के साथ नागरिक विशेषज्ञता को एकीकृत करे।
सीडीएस ने अंत में कहा कि जैसे-जैसे युद्ध थल, जल और नभ से आगे बढ़कर तकनीक और मानवीय समझ के क्षेत्र में विस्तार कर रहा है, भारत की तैयारी पारंपरिक ताकत को नागरिक एकीकरण के साथ जोड़ने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

