नई दिल्ली : कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आपातकाल लागू करने के फैसले को एक गलती करार दिया और कहा कि उनका मानना है कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ में यह भी लिखा है कि अगर संजय गांधी को ‘नियंत्रण में’ रखा गया होता तो आपातकाल लागू होने के बाद हुए नुक्सान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। अपने संस्मरण के विमोचन से पहले ब्रिटिश दैनिक को दिए एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने कहा, ‘मुझे हमेशा लगता है कि श्रीमती (इंदिरा) गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं।’ सोनिया गांधी के मुताबिक, आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेद थे। उनके पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाव तक इंतजार करने को कहा था। वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने पर जोर दिया था।
‘द गार्डियन’ की खबर के अनुसार, संजय गांधी ने परिवार के साथ एक रात्रिभोज के दौरान तर्क दिया था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा और कहा था, ‘उन्हें रोकना ही होगा।’ सोनिया गांधी के अनुसार, इस फैसले से परिवार के भीतर भी तनाव बढ़ गया था। राजीव गांधी ने अपनी मां से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी बात सुनने से इंकार कर दिया।

