करनाल। कर्णनगरी की दो राइस मिलों में 10.19 करोड़ रुपये का धान घोटाला प्रकाश में आया है। यह घोटाला डीएफएससी मुकेश कुमार ने भौतिक सत्यापन के दौरान पकड़ा। दोनों मिलों में 36 हजार क्विंटल धान कम मिला। यहां मशीनें भी चालू नहीं थी।
4 संचालकों सहित सात पर प्राथमिकी
इस संबंध में चार संचालकों, दो निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। 36 हजार क्विंटल धान गायब होने से सरकार को 10.19 करोड़ का नुकसान हुआ है। जिला खाद्य और आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने तरावड़ी के बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया था। इस दौरान बाला जी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान कम मिला। मिल में धान की देखरेख की जिम्मेदारी डीएफएससी निरीक्षक अब निलंबित देवेंद्र और सहायक निरीक्षक अब बर्खास्त रामफल की थी।
26 हजार क्विंटल धान था गायब
सरकार को धान के बदले चावल उपलब्ध कराने के लिए मिल के मालिक मोहित, सुरेंद्र और उनके पार्टनर अरुण की जिम्मेदारी थी। धान के बारे में पूछा तो जानकारी नहीं मिली। इसके अलावा सत्यापन में मिल में स्क्रैप मशीनरी मिली। आरोपी अब दूसरी मशीन लगा रहे थे। इसके बाद पांचों के खिलाफ तरावड़ी थाना में शिकायत दी। तरावड़ी थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि डीएफएससी मुकेश कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। डीएफएससी के भौतिक सत्यापन में सामने आया है कि विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान गायब था। मिल के अंदर धान से चावल बनाने के लिए मशीन भी नहीं मिली।
फर्जी तरीके से धान की अलॉटमेंट
इससे साफ है कि मिल को गलत तरीके से धान अलॉट किया गया था। इसके अलॉटमेंट पर डीएफएससी विभाग के निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के हस्ताक्षर हैं। आरोपी मिल मालिक महेंद्र जांगड़ा अब मिल में मशीन लगा रहा था। इससे स्पष्ट है कि उसने विभाग के निरीक्षकों से मिलीभगत करके फर्जी तरीके से धान की अलॉटमेंट करवाई है। इस मामले में मिल संचालक डीएफएससी निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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