इंटरनेशनल डेस्क: दुनिया के अलग-अलग देशों की मुद्राओं की ताकत अलग-अलग होती है। अमेरिकी डॉलर, यूरो और ब्रिटिश पाउंड को दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी में गिना जाता है, जो भारतीय रुपये की तुलना में काफी ज्यादा ताकतवर हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ देश ऐसे भी हैं, जिनकी मुद्रा भारतीय रुपये के मुकाबले कमजोर मानी जाती है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में एक भारतीय रुपये की कीमत वहां की मुद्रा से कई गुना ज्यादा होती है। लेकिन इन सब देशों से अलग एक ऐसा देश भी है, जहां भारतीय रुपये की ताकत बेहद ज्यादा है।
ईरान की मुद्रा सबसे कमजोर
यह देश ईरान है और उसकी मुद्रा ईरानी रियाल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक भारतीय रुपया करीब 463 ईरानी रियाल के बराबर है। यानी भारत के सिर्फ 216 रुपये ईरान में 1 लाख से ज्यादा रियाल की कीमत रखते हैं। अगर उल्टा हिसाब लगाया जाए तो ईरान में 10 लाख रियाल भारत में सिर्फ करीब 215 रुपये के बराबर रह जाते हैं। इसी वजह से ईरानी रियाल को दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल किया जाता है।
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कई सालों से दबाव में है ईरानी रियाल
ईरानी रियाल की हालत अचानक खराब नहीं हुई है। यह मुद्रा पिछले कई दशकों से कमजोर होती चली आ रही है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसकी गिरावट और तेज हो गई है। दिसंबर 2025 के अंत में ईरान की अर्थव्यवस्था उस समय गंभीर संकट में पहुंच गई, जब वहां अमेरिकी डॉलर का अनौपचारिक बाजार भाव करीब 14 लाख रियाल प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इसे ईरान के आर्थिक इतिहास की सबसे खराब स्थिति माना जा रहा है।
2018 के बाद तेजी से गिरी कीमत
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, साल 2018 के बाद से अब तक ईरानी रियाल अपनी लगभग 90 प्रतिशत कीमत खो चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं। इन प्रतिबंधों के चलते ईरान का तेल निर्यात घटा, विदेशी निवेश कम हुआ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भारी असर पड़ा। इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा। देश में महंगाई तेजी से बढ़ी, लोगों की खरीदने की ताकत कम होती गई और सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल हो गया।
वर्ल्ड बैंक ने भी जताई चिंता
ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक ने भी चिंता जाहिर की है। अक्टूबर 2025 में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2025 में ईरान की जीडीपी में करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है। वहीं साल 2026 में यह गिरावट और बढ़कर लगभग 2.8 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि ईरान की अर्थव्यवस्था अभी भी गंभीर संकट से जूझ रही है और हालात जल्द सुधरने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
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