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भारत आएंगे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, BRICS शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

Iranian President visit india

Iranian President visit india

नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। वह 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। ईरानी पक्ष ने उनकी भारत यात्रा की पुष्टि की है। इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है और शिखर सम्मेलन की मेजबानी नई दिल्ली में की जा रही है।

पेजेशकियान की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। उनके भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिति पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।

BRICS में ईरान की बढ़ रही भूमिका

ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। इसके बाद से वह इस संगठन के जरिए आर्थिक, व्यापारिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ईरान की BRICS में सक्रिय भागीदारी ऐसे समय में हो रही है, जब वह भारत सहित अन्य सदस्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है। पेजेशकियान इससे पहले अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं। उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, चाबहार बंदरगाह और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।

भारत-ईरान संबंधों पर होगी चर्चा

भारत और ईरान के बीच हाल के समय में उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच जुलाई 2026 में फोन पर बातचीत भी हुई थी। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय शांति और कूटनीति के जरिए विवादों को हल करने पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया था।

चाबहार बंदरगाह भी अहम मुद्दा

भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार बंदरगाह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत के लिए यह बंदरगाह मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापारिक संपर्क बढ़ाने के लिहाज से अहम है। 2024 में मोदी और पेजेशकियान की मुलाकात में भी चाबहार बंदरगाह और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी। पेजेशकियान के भारत दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही BRICS सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक स्तर पर सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

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