Last Updated: September 22, 2026

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एक और इतिहास रचने को तैयार ISRO, ‘बाहुबली’ से लॉन्च होगा देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट

November 2, 2025

एक और इतिहास रचने को तैयार ISRO, ‘बाहुबली’ से लॉन्च होगा देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट

नेशनल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। रविवार को इसरो अपने अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 को अंतरिक्ष में भेजेगा। इस उपग्रह का वजन लगभग 4,410 किलोग्राम है, जो भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में छोड़ा जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा।

ISRO ‘बाहुबली’ रॉकेट करेगा लॉन्च
इस मिशन के लिए इसरो अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M5 का इस्तेमाल कर रहा है। इसे इसकी भारी वजन उठाने की क्षमता के कारण ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है। यह रॉकेट लगभग 43.5 मीटर लंबा है और 4,000 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। इसरो ने बताया कि रॉकेट को पूरी तरह तैयार कर लिया गया है और उपग्रह के साथ जोड़ा भी जा चुका है। इसे लॉन्च से पहले के सभी कामों के लिए लॉन्चपैड पर पहुंचा दिया गया है। लॉन्चिंग रविवार शाम 5 बजकर 26 मिनट पर होगी।

 

तीन चरणों में होगी लॉन्चिंग

  1. दो ठोस मोटर (S200 स्ट्रैप-ऑन)
  2. एक द्रव ईंधन वाला कोर स्टेज (L110)
  3. एक क्रायोजेनिक स्टेज (C25)

इन तीनों चरणों की मदद से यह रॉकेट 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर सकता है। इसी कारण इस रॉकेट को GSLV MK3 यानी “भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क-3” भी कहा जाता है।

सैन्य उपयोग की चर्चा पर इसरो ने नहीं दी कोई जानकारी 
कुछ रिपोर्टों में यह कहा जा रहा है कि CMS-03 उपग्रह का उपयोग रक्षा और निगरानी उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि इसरो की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

 

इसरो की पांचवीं अभियानगत उड़ान
LVM3-M5 मिशन इसरो के लिए पांचवां अभियानगत मिशन होगा। इससे पहले, इसरो ने 5 दिसंबर 2018 को अपने सबसे भारी उपग्रह GSAT-11 को फ्रेंच गुयाना से एरियन-5 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया था। GSAT-11 का वजन 5,854 किलोग्राम था और यह इसरो द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।

चंद्रयान-3 भी इसी रॉकेट से हुआ था लॉन्च
गौरतलब है कि LVM3 रॉकेट का इस्तेमाल चंद्रयान-3 मिशन में भी किया गया था। इसी रॉकेट की मदद से भारत ने 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरकर इतिहास रच दिया था। यह रॉकेट 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड GTO में और 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) तक ले जाने में सक्षम है।

देश और समुद्री क्षेत्रों को देगा संचार सेवाएं
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भूभाग और आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में बेहतर संचार सेवाएं प्रदान करना है। CMS-03 एक बहु-बैंड संचार उपग्रह है, जो भारत की संचार क्षमता को और मजबूत बनाएगा।

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