चडीगढ़ Jeevanjot 2.0: ‘जीवनजोत 2.0’ ने केवल एक सप्ताह में राज्यभर की सड़कों और गलियों से 168 भीख मांगते बच्चों को सफलतापूर्वक बचाया। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डा. बलजीत कौर ने दी। उन्होंने बताया कि यह प्रोजैक्ट, जो लगभग 9 महीने पहले शुरू हुआ था, अब ‘जीवनजोत 2.0’ के रूप में अपग्रेड होकर और अधिक तेज, सुदृढ़ व प्रभावशाली ढंग से चलाया जा रहा है।
168 बच्चों को भीख मांगने से बचाया
डा. बलजीत कौर ने बताया कि बड़े शहरों में 125 छापेमारी अभियानों के दौरान 168 बच्चों को भीख मांगने से बचाया गया। इनमें से 80 बच्चों की पहचान उनके माता-पिता से होने के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से परिजनों को सौंपा गया, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे दोबारा सड़कों पर न लौटें। जिन 88 बच्चों की पहचान नहीं हो सकी है, उन्हें सरकार द्वारा संचालित बाल देखभाल गृहों में भेजा गया है। जहां उन्हें शिक्षा, पोषण, आवास, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है।
अयोग्य माता-पिता, तस्करों और गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई : बलजीत कौर
डा. बलजीत कौर ने चेतावनी दी कि यदि कोई अभिभावक या संरक्षक बच्चे को दोबारा भीख मांगने को मजबूर करेगा, तो उसे ‘अयोग्य संरक्षक’ घोषित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार, जिन गिरोहों या मानव तस्करों द्वारा बच्चों से जबरन भीख मंगवाई जा रही है। उनके खिलाफ भी कड़े पुलिस और कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। अंत में मंत्री ने आमजन और मीडिया से अपील की है कि यदि आप किसी बच्चे को भीख मांगते देखें, तो तुरंत चाइल्ड हैल्पलाइन 1098 पर कॉल करें। आपकी एक कॉल एक बच्चे की जिंदगी बदल सकती है।
सामाजिक रिपोर्ट, डीएनए जांच और अंतर्राज्यीय समन्वय
मंत्री ने बताया कि बच्चों की पृष्ठभूमि और आवश्यकताओं को समझने के लिए अब तक 25 सामाजिक जांच रिपोर्टे तैयार की जा चुकी हैं। 16 बच्चों के डीएनए परीक्षण शुरू हो चुके हैं। जिनमें, से 13 नमूने प्रयोगशाला को भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 बच्चे अन्य राज्यों से संबंधित पाए गए हैं। जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

