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हाईकोर्ट का फैसला : मरने के 17 साल बाद वापस मिली नौकरी, सभी सुविधाएं बहाल

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Job restored 17 years after death : अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने एक बेहद अनोखे और मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 17 वर्ष पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक की नौकरी बहाल करने का आदेश दिया है।

दशकों बाद नियुक्ति रद करना गलत : कोर्ट

यह मामला शिक्षक हर्षद भावसार की नियुक्ति से जुड़ा है, जिसे उनकी नियुक्ति के 33 साल बाद और मृत्यु के 17 साल बाद गुजरात सरकार ने रद कर दिया था। अदालत ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए न केवल नियुक्ति बहाल करने का निर्देश दिया, बल्कि उनकी विधवा पत्नी को पारिवारिक पेंशन का लाभ भी बहाल करने का रास्ता साफ कर दिया। राज्य सरकार के इस फैसले को खारिज करते हुए गुजरात हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद किसी की नियुक्ति को रद नहीं किया जा सकता।

33 साल पुरानी नियुक्ति पर विवाद

हर्षद भावसार और पांच अन्य लोगों को 1988 में सुज्ञान एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एक स्कूल में टीचर के तौर पर नियुक्त किया गया था। पद के लिए जरूरी योग्यता की पुष्टि करने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी ने 1989 में उनकी नियुक्ति को रेगुलर कर दिया था। शिक्षक हर्षद भावसार की साल 2004 में मौत हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी को फैमिली पेंशन मिलने लगी। साल 2021 में स्कूल के डायरेक्टर ने एक कड़ा कदम उठाते हुए हर्षद भावसार समेत छह शिक्षकों और एक लाइब्रेरियन की नियुक्ति को रद कर दिया था।

हाईकोर्ट ने सरकार की अपील ठुकराई

इस आदेश के तहत उन्हें मिलने वाले सभी सरकारी लाभ वापस ले लिए गए, उनके एम्प्लॉई नंबर ब्लॉक कर दिए गए और सैलरी व पेंशन का भुगतान भी तुरंत रोक दिया गया। इस फैसले के खिलाफ स्कूल ट्रस्ट और प्रभावित कर्मचारियों (जिसमें मृत शिक्षक भावसार की पत्नी भी शामिल थीं) ने साल 2021 में ही गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया। अपील खारिज करते समय जस्टिस एन एस संजय गौडा और जे एल ओदेदरा की डिवीजन बेंच ने कहा कि तीन दशक (30 साल) से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद इस तरह नियुक्तियां रद नहीं की जा सकतीं।

नियुक्ति रद करना उचित नहीं : हाईकोर्ट

सिंगल बेंच के इस फैसले से असहमत होकर राज्य सरकार ने विशेष रूप से हर्षद भावसार की नियुक्ति बहाली के खिलाफ हाई कोर्ट की डिवीन बेंच में अपील दायर की। लेकिन कोर्ट ने सरकार की इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इतने लंबे समय के बाद इस तरह की कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं है। सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए बेंच ने कहा कर्मचारी की विधवा को फैमिली पेंशन देने के बाद, राज्य अब उसी नियुक्ति पर सवाल उठा रहा है जिसे उसके अधिकारियों ने रेगुलर किया था।

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