
नई दिल्ली। वर्ल्ड लेक डे के मौके पर JS Water Energy Life (JS-WEL) ने देशभर में जल संरक्षण और प्रदूषित जलस्रोतों को दोबारा उपयोग के लायक बनाने के अपने प्रयासों की जानकारी साझा की। संस्था का कहना है कि उसका लक्ष्य केवल पानी की गंदगी हटाना नहीं, बल्कि जलस्रोतों की गुणवत्ता सुधारना, जलीय पर्यावरण को फिर से बेहतर बनाना और उपचारित पानी का उपयोग सिंचाई जैसे कामों में सुनिश्चित करना है।
ग्रेटर नोएडा के कसना क्षेत्र में JS-WEL ने चार सामुदायिक तालाबों पर काम किया। संस्था के अनुसार, इन तालाबों में घुली हुई ऑक्सीजन (DO) के स्तर में औसतन 152 प्रतिशत का सुधार हुआ। पहले ऑक्सीजन का स्तर 0.8 से 1.2 mg/L के बीच था, जो उपचार के बाद बढ़कर 2.5 से 4 mg/L तक पहुंच गया। इन तालाबों के उपचार से हर साल करीब 1.73 करोड़ लीटर पानी की बचत हो रही है। उपचारित पानी का इस्तेमाल स्थानीय किसान सिंचाई के लिए कर रहे हैं। संस्था के मुताबिक, निगरानी अवधि के दौरान चारों तालाबों में मछलियों की मौत की कोई घटना सामने नहीं आई।
कसना में जल संरक्षण के लिए जलकुंभी हटाने के साथ जैविक उपचार और शैवाल प्रबंधन किया गया। इसका उद्देश्य केवल ऊपर दिखाई देने वाली जलकुंभी को हटाना नहीं, बल्कि पानी में मौजूद अतिरिक्त पोषक तत्वों और खराब जल गुणवत्ता जैसी उन वजहों को दूर करना भी है, जिनसे जलकुंभी बार-बार बढ़ती है।
पंजाब के खरार में JS-WEL ने ‘जयंती की राव चो’ नाम के एक जल चैनल पर काम किया। यह चैनल पहले सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता था, लेकिन लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा था। संस्था के अनुसार, यहां करीब 47.7 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) प्रदूषित पानी का उपचार किया गया। यह मात्रा सालाना लगभग 17,400 मिलियन लीटर पानी के बराबर है। उपचार के बाद इस पानी को दोबारा सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने योग्य बनाया गया।
पानी की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर 1.2 mg/L से बढ़कर 5.5 mg/L हो गया। वहीं, BOD यानी जैविक प्रदूषण का स्तर 196 से घटकर 25 mg/L और COD 576 से घटकर 90 mg/L रह गया। फेकल कोलीफॉर्म, जो पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया का संकेतक है, उसका स्तर भी 2,400 से अधिक से घटकर 230 MPN/100 ml से कम हो गया। पंजाब में हुए इस काम को थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (TIET), पटियाला से शुरुआती स्वतंत्र मान्यता भी मिली है।
JS Water Energy Life के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुनील नंदा ने कहा कि देश को केवल साफ किए गए जलस्रोतों की जरूरत नहीं है। जरूरत ऐसे जलस्रोतों की है जिन्हें प्रदूषण से मुक्त करने के साथ दोबारा जीवित किया जाए और उपयोग के योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की सफलता का सही पैमाना यह है कि किसी जलस्रोत की पर्यावरणीय स्थिति बेहतर होने के साथ उसका पानी दोबारा उपयोग में भी लाया जा सके। JS-WEL के अनुसार, संस्था इसी दिशा में देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रही है।