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कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भगदड़ मामले में स्थिति रिपोर्ट दायर करने के दिए निर्देश

June 6, 2025

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भगदड़ मामले में स्थिति रिपोर्ट दायर करने के दिए निर्देश

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने यहां क्रिकेट स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत और 50 से अधिक लोगों के घायल होने के मामले में वीरवार को राज्य सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेने के बाद राज्य को नोटिस जारी करके 10 जून तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और जस्टिस सी.एम. जोशी की पीठ ने कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस मामले को स्वत: संज्ञान जनहित याचिका के रूप में देखे।

आईपीएल के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत के बाद 4 जून को यहां जश्न के दौरान मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई और 56 अन्य लोग घायल हो गए। जब मामला खंडपीठ के समक्ष आया, तो महाधिवक्ता शशि किरण शैट्टी ने कहा कि स्टेडियम में मुफ्त प्रवेश की घोषणा के कारण गेट पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे भगदड़ मच गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को नकारात्मक रवैये से नहीं देखना चाहती। शैट्टी ने कहा, दोषारोपण सही नहीं है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि क्या गलत हुआ और यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी त्रसदियां दोबारा न हों।

आरसीबी की आईपीएल खिताबी जीत के बाद शहर में जश्न के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का जिक्र करते हुए शैट्टी ने कहा कि चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर स्थिति अराजक हो गई थी। उन्होंने कहा कि स्टेडियम और उसके आसपास 2.5 लाख से अधिक लोग इकट्ठा हो गए थे, जबकि इसकी क्षमता लगभग 30,000 है। उन्होंने बताया, लोगों को स्टेडियम के अंदर भारी भीड़ होने का अंदाजा नहीं था। पीठ ने कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन किया जाना चाहिए था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा, घटनास्थल पर एम्बुलैंस उपलब्ध होनी चाहिए थी और निकटतम अस्पतालों के बारे में स्पष्टता होनी चाहिए थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, महाधिवक्ता ने कहा कि एम्बुलैंस वास्तव में मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि वे इस पैमाने की आपात स्थिति के लिए पर्याप्त नहीं थीं। उन्होंने कहा, मुद्दा उनकी अनुपस्थिति नहीं, बल्कि संख्या का था। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मैजिस्ट्रेट जांच पहले ही शुरू हो चुकी है और यह 15 दिन में पूरी हो जाएगी। मामले को आगे की सुनवाई 10 जून को तय की गई है।

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