Last Updated: September 29, 2026

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कर्नाटक: प्रज्वल रेवन्ना की बैरक में मोबाइल मिलने की होगी जांच, DIG की अगुवाई में विशेष टीम गठित

August 13, 2026

कर्नाटक: प्रज्वल रेवन्ना की बैरक में मोबाइल मिलने की होगी जांच, DIG की अगुवाई में विशेष टीम गठित

बेंगलुरु: कर्नाटक पुलिस ने पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना की जेल की बैरक से मोबाइल फोन मिलने के मामले की जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया है। प्रज्वल रेवन्ना रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

कारागार विभाग के महानिदेशक आलोक कुमार ने विशेष टीम के गठन की पुष्टि की। इस टीम का नेतृत्व डीआईजी कारागार एवं सुधार जिनेंद्र खनागवी करेंगे। टीम को यह जांच सौंपी गई है कि मोबाइल फोन प्रज्वल रेवन्ना की जेल बैरक तक कैसे पहुंचा।

प्रज्वल पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। टीम यह भी पता लगाएगी कि फोन किसने उन्हें दिया और उन्होंने कितने समय तक उस डिवाइस का इस्तेमाल किया। यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया जब प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु सेंट्रल जेल की वीआईपी बैरक से हटाकर अन्य सजायाफ्ता कैदियों वाली सामान्य सेल में शिफ्ट कर दिया गया। यह कार्रवाई उनकी बैरक से मोबाइल फोन बरामद होने की खबर के बाद की गई। मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर 17 सेकंड का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में प्रज्वल अपनी जेल की बैरक के अंदर मोबाइल पर बात करते दिख रहे थे।

वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जेल अधिकारियों ने अब तक इस फुटेज पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वायरल वीडियो में प्रज्वल अनिवार्य जेल वर्दी के बजाय रंगीन कपड़े पहने हुए दिख रहे थे। कोठरी में सीलिंग फैन भी लगा दिख रहा था। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए भी सुना गया था कि उन्होंने दो दिन पहले भी कॉल किया था। इस वीडियो के बाद सवाल उठे हैं कि सुरक्षा इंतजामों के बावजूद मोबाइल फोन उनकी बैरक तक कैसे पहुंचा और जेल के अंदर से कॉल कैसे हो सकी। जेल में मोबाइल जैमर लगे होने के बावजूद ऐसा कैसे हुआ, इसकी भी जांच होगी। पुलिस के अनुसार, विशेष टीम यह भी जांच करेगी कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैदियों की बैरकों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं। जेल के अंदर कथित तौर पर आंध्र प्रदेश से आए सिम कार्ड मिलने की भी जांच की जाएगी।

डीआईजी जिनेंद्र खनागवी ने डीजीपी कारागार आलोक कुमार से मुलाकात कर जांच को लेकर चर्चा की है। टीम यह भी पता लगाएगी कि जेल अधिकारियों की कोई मिलीभगत या लापरवाही तो नहीं थी। यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी जेल कर्मी ने फोन रखने या इस्तेमाल करने में मदद की। आलोक कुमार ने कहा, “कड़ी सुरक्षा के बीच कैदियों की कोठरियों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं। क्या जेल अधिकारियों की कोई मिलीभगत है, इसकी भी जांच होगी।” यह याद दिलाना जरूरी है कि मोबाइल फोन बरामद होने के बाद प्रज्वल को अब करीब 20 अन्य कैदियों वाली सेल में रखा गया है, जहां एक ही शौचालय है। उन्हें अनिवार्य जेल वर्दी पहनने और जेल लाइब्रेरी में ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है। हाल ही में सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में छापेमारी की थी।

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