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जम्मू-कश्मीर: विधानसभा सत्र के लिए सरकार ने उपराज्यपाल को भेजी सिफारिश, जानें तारीख

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज़ होने जा रही हैं। राज्य कैबिनेट ने उपराज्यपाल को 13 अक्टूबर से विधानसभा सत्र बुलाने की सिफारिश भेज दी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसमें सभी पांच कैबिनेट मंत्रियों ने हिस्सा लिया और सत्र के एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस प्रस्तावित सत्र की अवधि सीमित रखी गई है, जो 13 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चल सकता है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत दो सत्रों के बीच अधिकतम छह माह का अंतर होना चाहिए। पिछला सत्र 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था, इस कारण 28 अक्टूबर से पहले अगला सत्र होना अनिवार्य था।

इन मुद्दों पर गरमाएगा सदन का माहौल

सूत्रों के अनुसार, इस सत्र के दौरान कई गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दों पर बहस की संभावना है। विशेष राज्य का दर्जा, आरक्षण नीति में बदलाव, डोडा से विधायक मेराज मलिक की नजरबंदी, और हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं बाढ़ व भूस्खलन से हुए नुकसान पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष इस बार सरकार से तीखे सवाल पूछेगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बागवानी और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं पर सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्यों की गति को लेकर बहस होना तय है।

पिछले सत्र की गूंज इस बार भी सुनाई दे सकती है

पिछले विधानसभा सत्र की गूंज इस बार भी सदन में सुनाई दे सकती है। उस समय वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर उठे विवाद के कारण सदन में भारी हंगामा देखने को मिला था। साथ ही, राज्य के विशेष दर्जे से जुड़े तीन प्रस्ताव रद्द कर दिए गए थे, जिससे विपक्ष में असंतोष फैल गया था।

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद गनी लोन ने उस समय आरक्षण नीति पर सरकार को आड़े हाथों लिया था, और माना जा रहा है कि इस बार वे और अधिक आक्रामक रुख अपनाएंगे।

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