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इस बैंक ने ग्राहकों को दी बड़ी राहत, बचत खातों में मिनिमम बैलेंस जीरो होने पर नहीं लगेगा कोई जुर्माना

नेशनल डेस्क : केनरा बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। बैंक ने घोषणा की है कि अब उसके बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। यानी अगर ग्राहक के खाते में न्यूनतम राशि नहीं रहती है, तो भी उन्हें किसी तरह का जुर्माना या पेनल्टी नहीं देना होगा। यह नया नियम 1 जून से लागू हो चुका है और इसका लाभ अब सभी ग्राहकों को मिलना शुरू हो गया है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

पहले क्या था नियम?

दरअसल, अब तक केनरा बैंक के ग्राहकों को अपने बचत खाते में हर महीने एक निश्चित न्यूनतम औसत राशि (Minimum Average Balance) बनाए रखनी पड़ती थी। यह राशि खाते के प्रकार और ब्रांच की स्थिति (शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण) पर निर्भर करती थी। यदि ग्राहक ऐसा नहीं कर पाते थे, तो बैंक अतिरिक्त शुल्क वसूलता था। इससे खासकर उन लोगों को परेशानी होती थी जो सीमित आय में जीवनयापन करते हैं या जिनकी बैंकिंग जानकारी सीमित है।

फैसले से किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा 

बैंक के इस नए फैसले से लाखों ग्राहकों को राहत मिलेगी। विशेषकर छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, कम आय वर्ग के लोगों, ग्रामीण इलाकों के निवासियों, पहली बार बैंकिंग से जुड़ने वाले खाताधारकों और अनिवासी भारतीयों (NRI) को इससे सीधा लाभ मिलेगा। अब ये सभी ग्राहक बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने खाते का संचालन कर सकेंगे। उन्हें यह चिंता नहीं रहेगी कि खाते में न्यूनतम राशि नहीं है तो पेनल्टी लगेगी।

बिना जुर्माने वाला बचत खाता 

केनरा बैंक का यह कदम उसे उन कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की श्रेणी में ला देता है जो बिना पेनल्टी वाला बचत खाता उपलब्ध कराते हैं। बैंक ने इस फैसले को ग्राहकों की सुविधा और समावेशी बैंकिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल बताया है। बैंक की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि यह निर्णय खासतौर पर उन लोगों के लिए मददगार है जो बैंकिंग की दुनिया में नए हैं या जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं है।

अब बैंकिंग आसान और सस्ती

केनरा बैंक का यह नया नियम ग्राहकों को वित्तीय आज़ादी देगा और बैंकिंग को और अधिक सुलभ और सरल बनाएगा। अब आम आदमी भी बिना किसी जुर्माने की चिंता के अपने बचत खाते का प्रयोग कर सकेगा। यह पहल वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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