रुद्रप्रयागः उत्तराखंड के पवित्र धाम केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। बता दें कि इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण देखने को मिला। मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया, जिससे इसकी दिव्यता और भी बढ़ गई।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी और स्वागत संदेश
इस शुभ मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। उन्होंने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए चार धाम यात्रा के सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने इसे उत्तराखंड की आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व बताया।
उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं को बधाई दी। उन्होंने भगवान शिव से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की और इस यात्रा को आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बताया।
#WATCH | रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड: श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। pic.twitter.com/kE39f1zxBc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 22, 2026
मंदिर परिसर में मोबाइल और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध
बता दें कि इस वर्ष प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने, वीडियो बनाने या रील शूट करने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके अलावा, बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना भी प्रतिबंधित किया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए मोबाइल जमा करने हेतु विशेष काउंटर और लॉकर की व्यवस्था की है।
#WATCH उत्तराखंड: आज श्रद्धालुओं के लिए श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई।
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद हैं। pic.twitter.com/oD45H1dDJB
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 22, 2026
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
चार धाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया से हो चुकी है और तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे मौसम को ध्यान में रखते हुए गर्म कपड़े साथ रखें, क्योंकि क्षेत्र में ठंड और बर्फबारी के कारण तापमान काफी कम बना हुआ है।
आस्था के साथ नियमों का पालन जरूरी
मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और धाम की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग दें। यह यात्रा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का भी प्रतीक मानी जाती है।

