नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने निर्वाचन आयोग की आलोचना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने को लेकर शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और चुनौती दी कि वह चुनावों में अपनी हार का कारण बताए। रीजीजू ने कांग्रेस पर संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। रीजीजू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कांग्रेस से पांच सवाल पूछे। उन्होंने सवाल किया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 44 सीट पर कैसे सिमट गई, जबकि उस समय चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति उसकी अपनी सरकार ने की थी। उन्होंने सवाल किया, “2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सिर्फ 44 उम्मीदवार क्यों जीते, जबकि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति उसकी अपनी सरकार ने की थी?”
साल 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए रीजीजू ने सवाल कि कांग्रेस लगातार तीसरी बार चुनाव में कैसे हार गई, जबकि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।ज्ञानेश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयुक्त थे और उन्होंने 15 मार्च 2024 को यह पद संभाला था। वह 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त बने। रीजीजू ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्री 2014 से 2026 के बीच हुए चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए अपने पदों से इस्तीफा देंगे और माफी मांगेंगे?
मतदाता सूची के एसआईआर का बचाव करते हुए रीजीजू ने कहा कि अवैध प्रवासियों, मृत मतदाताओं, दूसरी जगह जा चुके लोगों और मतदाता सूची में दर्ज दोहरी प्रविष्टियों के नाम हटाए जाने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से सवाल कि क्या वह ऐसे नामों को हटाने का भी विरोध करती है? उन्होंने मतदाता सूची के पहले हुए विशेष गहन पुनरीक्षणों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 का एसआईआर गैरकानूनी था? मंत्री ने आरोप लगाया, “बाहरी ताकतों के साथ मिलकर काम करने वाली एक परिवारवादी पार्टी संविधान और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश कर रही है।”
रीजीजू का यह बयान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर जारी कानूनी और राजनीतिक विवाद के बीच आया है। निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने 26 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज किया था। आयोग ने कहा था कि एसआईआर से जुड़े आदेश तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूर किए थे।

