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कुल्लू दशहरा: सात रंगों में सजे रघुनाथ जी, दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु

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Kullu Dussehra: Lord Raghunath’s Camp Draws Devotees : कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के आगाज के साथ ही ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ का अस्थायी शिविर आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान रघुनाथ और माता सीता के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं।

विशेष बात यह है कि उत्सव के सातों दिन भगवान रघुनाथ को अलग-अलग रंगों के वस्त्र पहनाए जाते हैं। दिन में चार बार श्रृंगार, विधिवत पूजा-अर्चना, आरती और भोग की परंपरा निभाई जा रही है। घाटी के देवी-देवता भी भगवान रघुनाथ के समक्ष शीश नवा रहे हैं, जबकि महिलाएं रोजाना भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बना रही हैं।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि कुल्लू दशहरा में भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना में खास बात यह है कि भगवान रघुनाथ के लिए दिन के हिसाब से वस्त्र भी बनाए जा रहे हैं। वीरवार को भगवान को पीला वस्त्र अर्पित किया गया और शुक्रवार को भगवान को गुलाबी वस्त्र पहनाया जाएगा। ऐसे में भगवान की पूजा आरती देखने के लिए भी श्रद्धालु उमड़ रहे हैं और महिलाओं के द्वारा शिविर में रोजाना भजन कीर्तन का भी आयोजन किया जा रहा है। देवी-देवताओं के महाकुंभ दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ का अस्थाई कैंप जहां आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वहीं, भगवान रघुनाथ का श्रृंगार एक दिन में 4 बार किया जा रहा है।

रघुनाथ जी दशहरा उत्सव के अधिष्ठाता देव माने जाते हैं। इसके अलावा रघुनाथ जी रोज सीता माता के साथ सज-धज कर अपने अस्थाई शिविर में अपने सिंहासन पर विराजमान होते हैं। दशहरा पर्व में हर रोज रघुनाथ का श्रृंगार सुंदर वस्त्रों और कीमती आभूषणों से किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान 7 दिन अलग-अलग रंग के भगवान को वस्त्र पहनाए जाते हैं। सोमवार के दिन भगवान को सफेद रंग के वस्त्र, मंगलवार को लाल रंग के, बुधवार को हरे रंग के, वीरवार को पीले रंग के, शुक्रवार को गुलाबी रंग के वस्त्र, शनिवार को हल्के नीले रंग के और रविवार को फिर से लाल रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं। इन वस्त्रों को राज परिवार के द्वारा ही तैयार किया जाता है और वस्त्रों का विधिवत पूजा-अर्चना के बाद ही उन्हें भगवान को अर्पित किया जाता है। ऐसे में भगवान के साज श्रृंगार को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग अस्थाई शिविर में पहुंचते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि अस्थायी शिविर में प्रातः पूजा के लिए मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह एवं अन्य पुजारियों ने मंत्रोच्चारण के साथ दूध, दही, शहद, जल, पंचामृत, घी, शक्कर, तुलसी, जल के साथ विधिवत स्नान करवाया गया। वहीं, भगवान रघुनाथ को रेशमी वस्त्र, चंदन और कुमकुम के तिलक लगाया गया और सोने-चांदी के गहनों से हार श्रृंगार कर भगवान रघुनाथ, माता सीता नरसिंह भगवान, शालिग्राम, हनुमान को गद्दी पर बैठाकर विभिन्न प्रकार के फूलों के साथ पूजा अर्चना भी की गई। उसके बाद पुजारियों ने मंत्रोच्चारण के साथ पुष्प, ध्रुव अ किए और धूप, दीप से अर्पित किए गए।

 

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