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अंडमान-निकोबार में मिला प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी जानकारी

hardeep singh puri

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नेशनल डेस्क: भारत को ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास समुद्र में प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भंडार मिलने की जानकारी सामने आई है। इस खोज को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी कंपनी Oil India Limited ने अंडमान अपतटीय बेसिन में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज की है। यह खोज अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्री इलाके में की गई है, जिस कुएं में गैस के संकेत मिले हैं, वह समुद्र के भीतर करीब 1900 मीटर की गहराई पर स्थित है। आने वाले वर्षों में ऐसी खोजें देश को ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

 

शुरुआती परीक्षण में मिली सफलता

खोज के बाद किए गए शुरुआती परीक्षणों में गैस की लगातार मौजूदगी दर्ज की गई। परीक्षण के दौरान गैस के जलने से यह स्पष्ट हुआ कि वहां प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है। अब गैस के नमूनों को विस्तृत जांच और गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

समुद्र मंथन मिशन को मिलेगा बल

सरकार का मानना है कि यह खोज प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर घोषित ‘समुद्र मंथन मिशन’ के उद्देश्यों को मजबूत करेगी। इस मिशन का लक्ष्य समुद्र के भीतर मौजूद ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की खोज को बढ़ावा देना है।

तीन में से दो कुओं में मिले हाइड्रोकार्बन के संकेत

ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा अंडमान बेसिन में अब तक तीन कुओं की खुदाई की जा चुकी है। इनमें से दो कुओं में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इससे क्षेत्र में तेल और गैस के बड़े भंडार मिलने की संभावनाएं और बढ़ गई हैं।

भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्यों है अहम?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भविष्य में भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही गहरे समुद्र में ऊर्जा संसाधनों की खोज और विकास के क्षेत्र में नए अवसर भी खुल सकते हैं। इस सफलता से भारत को वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ तकनीकी और निवेश सहयोग बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।

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