पुणे: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की निर्णायक भूमिका रही है। शाह ने साथ ही यह भी कहा कि इस दौरान देश की सशस्त्र सेनाओं की रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों क्षमताओं में बड़ा बदलाव आया है। लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 समारोह में डोभाल को सम्मानित करने के बाद आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भारत की विदेश नीति को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर फैसले के पीछे डोभाल की ‘भूमिका और उनकी सलाह’ रही है। शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित नए राष्ट्रवाद की नींव रखी और आज देश उसी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, अब इससे पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शाह ने कहा, ‘पिछले 12 वर्षों में नरेन्द्र मोदी सरकार ने हमारी सशस्त्र सेनाओं की रक्षात्मक क्षमताओं के साथ-साथ उनकी आक्रामक क्षमताओं में भी बड़ा बदलाव किया है और इस परिवर्तन में डोभाल साहब का निर्णायक योगदान रहा है।’ शाह ने कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला चयन अजित डोभाल को एनएसए के रूप में नियुक्त करके किया था।
शाह ने आसूचना ब्यूरो और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में डोभाल के विशिष्ट करियर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बहु-एजैंसी केंद्र की मजबूत नींव रखी, जो आज देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ बना हुआ है। उन्होंने कहा कि खुफिया अभियानों की प्रकृति ऐसी होती है कि डोभाल के कार्यों का बड़ा हिस्सा कभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल का इतिहास लिखा जाएगा, तब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में डोभाल के योगदान के लिए उसमें एक ‘स्वर्णिम अध्याय’ अवश्य समर्पित करना होगा।

