जन्मदिवस विशेष : टूटते समाज की शिराओं में बहता धर्म भगवान परशुराम

अंबाला। जब समय की धड़कनें असंतुलन की ओर झुकने लगती हैं, जब धर्म केवल ग्रंथों के शब्दों में सीमित होकर रह जाता है और अधर्म सत्ता के सिंहासन पर बैठकर निरंतर मानवता को कुचलने लगता है—तब इतिहास अपने भीतर से एक ऐसी अद्भुत शक्ति को जन्म देता है जो युगों की दिशा को बदल देने … Continue reading जन्मदिवस विशेष : टूटते समाज की शिराओं में बहता धर्म भगवान परशुराम