Maa Daat Kali Mandir in Dehradun : प्रधानमंत्री Narendra Modi आज दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले उत्तराखंड की शांत वादियों में बसे मां डाट काली मंदिर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना की। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट और चमत्कारी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। खास बात यह है कि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने यहां आकर दर्शन किए हैं। आइये इसे विस्तार से जानते हैं…
#WATCH प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून के पास जय मां डाट काली मंदिर में पहुंचे।
प्रधानमंत्री जल्द ही दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। यह कॉरिडोर दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय को 6 घंटे से घटाकर लगभग 2.5 घंटे कर देगा।
(सोर्स: DD) pic.twitter.com/c1Emc12VjT
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 14, 2026
मंदिर का स्थान और पहचान
मां डाट काली मंदिर देहरादून शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर, देहरादून–सहारनपुर मार्ग पर स्थित है। यह शिवालिक पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है।
यह मंदिर देहरादून की पहचान का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
मंदिर का इतिहास (1804 में स्थापना)
• इस मंदिर का निर्माण 13 जून 1804 को महंत दिगंबर दत्त महाराज ने करवाया था
• उस समय देहरादून और गढ़वाल पर गोरखाओं का शासन था
• इसलिए इसे गोरखा काल का मंदिर भी माना जाता है
मंदिर का नाम ‘डाट काली’ कैसे पड़ा?
इस मंदिर के नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। मंदिर एक सुरंग (जिसे स्थानीय भाषा में “डाट” कहा जाता है) के पास बना है। पहले इस स्थान को “घाटे वाली देवी” कहा जाता था। अंग्रेज अफसर के गलत उच्चारण के कारण “दंतकाली” नाम बदलकर “डाट काली” हो गया।
चमत्कार से जुड़ी मान्यता
लोककथा के अनुसार जब अंग्रेज यहां सुरंग बना रहे थे, तो वह बार-बार गिर जाती थी। मुख्य इंजीनियर को मां काली ने सपने में दर्शन दिए। देवी ने कहा कि यहां उनकी मूर्ति स्थापित की जाए। इसके बाद मंदिर बना और सुरंग गिरना बंद हो गया।
धार्मिक महत्व और आस्था
• यह मंदिर एक सिद्ध पीठ माना जाता है
• मान्यता है कि यहां माता सती का कंठ गिरा था
• 1804 से यहां अखंड ज्योति जल रही है
• हवन कुंड भी लगातार प्रज्वलित रहता है
लोगों की आस्था और परंपराएं
• नए वाहन लेने से पहले लोग यहां पूजा करवाते हैं
• सफर शुरू करने से पहले माता का आशीर्वाद लिया जाता है
• नवविवाहित जोड़े भी यहां दर्शन करने आते हैं
• मां को राहगीरों की रक्षक देवी माना जाता है
क्यों है यह मंदिर खास?
• 200 साल से ज्यादा पुराना इतिहास
• चमत्कारों से जुड़ी मान्यताएं
• प्रकृति के बीच शांत और आध्यात्मिक वातावरण
• देहरादून आने-जाने वालों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र

