Last Updated: October 10, 2026

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योगिनी एकादशी पर महाकाल मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, भस्म आरती में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु

July 10, 2026

योगिनी एकादशी पर महाकाल मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, भस्म आरती में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु

उज्जैन: योगिनी एकादशी के पावन पर उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे।बाबा महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार देर रात से ही मंदिर परिसर और गर्भगृह के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। जैसे ही मंदिर के कपाट शुक्रवार सुबह 4 बजे खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा और भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। आरती की शुरुआत परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर और हरिओम का जल अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया।

कपूर आरती संपन्न होने के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए इस आरती का विशेष महत्व माना जाता है। भस्म आरती से पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक के पश्चात भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों का लेप अर्पित किया गया। भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र, रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा रंग-बिरंगे पुष्पों से अलंकरण किया गया। दिव्य आभूषणों और पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। आरती संपन्न होने के बाद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं।

पूरे मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। योगिनी एकादशी के अवसर पर आयोजित इस विशेष भस्म आरती में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। जानकारी के मुताबिक, पहले महाकाल को श्मसान की राख अर्पित की जाती थी लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।

भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है, जिसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है।

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