
नेशनल डेस्कः भारत के लिए अमेरिका से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े व्यापार पर लगाए जाने वाले कई प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू नहीं करने का फैसला किया है। इससे भारत पर लगने वाले 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का खतरा कुछ समय के लिए टल गया है। दरअसल, अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी की थी। इसके लिए एक नया कानून भी लाया गया था, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत भारत समेत कई देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान था।
हालांकि, शुक्रवार देर रात जारी एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने इन प्रतिबंधों और शुल्कों को फिलहाल लागू करने से छूट दे दी। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। लेकिन इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि भारत को हमेशा के लिए राहत मिल गई है। ट्रंप प्रशासन भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन टैरिफ को दोबारा लागू कर सकता है।
क्या है पूरा मामला, भारत पर क्यों मंडरा रहा था खतरा?
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों से होने वाली कमाई उसके युद्ध को जारी रखने में मदद कर सकती है। इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से व्यापार करने वाले देशों पर सख्त टैरिफ लगाने की योजना बनाई थी। इस योजना में उन देशों को निशाना बनाने की तैयारी थी, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं।
भारत भी रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल है। ऐसे में अगर अमेरिका 100 प्रतिशत टैरिफ लागू कर देता, तो भारतीय सामानों को अमेरिकी बाजार में बेचने की लागत काफी बढ़ सकती थी। इससे भारतीय कारोबारियों और अमेरिका को सामान निर्यात करने वाली कंपनियों पर दबाव पड़ने की आशंका थी। अब ट्रंप के ताजा आदेश से भारत को फिलहाल राहत मिली है।
ट्रंप ने किस कानून के तहत टैरिफ लगाने की तैयारी की थी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और रूस को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों को कम करना बताया गया था।
इस कानून के तहत ट्रंप प्रशासन को रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का अधिकार दिया गया था। इसमें ऐसे देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। इसके अलावा, रूस से जुड़ी कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और रूस से अमेरिका में आयात होने वाले ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी बताया गया था। इस कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए ट्रंप प्रशासन को 30 दिन का समय दिया गया था। यह समय-सीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी।
किन देशों पर पड़ सकता था असर
रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का नाम भी शामिल था। अमेरिका की प्रस्तावित योजना के तहत रूस से व्यापार करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाना था। इसके लिए इन देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का रास्ता तैयार किया गया था। अगर यह कदम लागू होता, तो भारत और चीन जैसे बड़े व्यापारिक देशों के लिए अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचना महंगा हो सकता था। इससे दोनों देशों के निर्यात कारोबार पर असर पड़ने की आशंका थी।फिलहाल ट्रंप के नए आदेश से इस कार्रवाई पर रोक लग गई है, लेकिन भविष्य में स्थिति बदल सकती है।
क्या है ग्राहम एक्ट और इसका उद्देश्य?
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़े कानून के रूप में पेश किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस के उन आर्थिक स्रोतों को कमजोर करना था, जिनसे उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल सकती है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और रूस के सैन्य अभियानों को समर्थन देने वाली विदेशी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल था। इसके साथ ही, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई थी। इसका मकसद दूसरे देशों को रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर करना था।
क्या भारत पर दोबारा लग सकता है 100% टैरिफ
यह सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इन टैरिफ और प्रतिबंधों को लागू करने से छूट दी है, लेकिन इसे स्थायी राहत नहीं माना जा सकता। कार्यकारी आदेश के अनुसार, ट्रंप ने मौजूदा समय में इन कदमों को लागू करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं माना। हालांकि, भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर अमेरिकी प्रशासन फिर से टैरिफ लगाने का फैसला कर सकता है। इसलिए भारत के लिए फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन रूस से तेल खरीदने और अमेरिका के साथ व्यापार से जुड़े मामलों पर आगे भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। रूस से तेल की खरीद भारत की ऊर्जा आपूर्ति का भी एक हिस्सा है। यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देता, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने का खतरा था।
ऐसे में ट्रंप का फिलहाल टैरिफ लागू नहीं करने का फैसला भारत के लिए राहत देने वाला है। हालांकि, आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी सरकार का रुख महत्वपूर्ण बना रहेगा। फिलहाल निष्कर्ष यही है कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा टल गया है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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