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अब ममता का दिल्ली में आखिरी दांव, क्या जुड़ पाएगा INDIA गठबंधन?

कोलकाता। केंद्र में एनडीए के खिलाफ बनाए इंडिया गठबंधन के फिर से जीवित होने का समय आ गया है। इसके लिए पश्चिम बंगाल में शिकस्त खाई ममता दीदी सक्रिय नजर आने लगी हैं।
हो भी क्यों न। अब मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद और कोई रास्ता नजर भी नहीं आ रहा है। इसके लिए उन्होंने दिल्ली में 8 जून को महाबैठक का ऐलान किया है। ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

एक सवाल ये भी

सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह INDIA गठबंधन को फिर से एकजुट करने की रणनीति साबित होगी या विपक्षी एकता में और दरार डालने वाला कदम। बंगाल की अंदरूनी राजनीति और दिल्ली की सियासी चालों के बीच विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा से शिकस्त खाने के बाद अब ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती इंडिया गठबंधन को एकजुट करने की है। इसके लिए 8 जून को दिल्ली में महाबैठक का ऐलान किया है। ऐसे में क्या ममता बनर्जी इससे इंडिया गठबंधन को एकजुट कर पाएंगी? ये बड़ा सवाल है। बंगाल में हार के बाद दिल्ली की इस बैठक में इंडिया गठबंधन को एक सूत्र में पिरो पाना अब किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसके पीछे कई वजह हैं। सबसे बड़ी वजह गठबंधन के दलों पर एकदूसरे पर भरोसा नहीं होना। एक ओर जहां बंगाल में ममता कांग्रेस और वाम दलों को छोड़कर अकेले चुनाव लड़ रहीं थीं वहीं अब वो किस मुंह से कहेंगी कि इंडिया गठबंधन में वो एक साथ आ जाएं।

गठबंधन की एकता पर सवाल

ममता बनर्जी ने गठबंधन के बंगाल में कांग्रेस और वाम दलों के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिससे गठबंधन में कड़वाहट पैदा हो गई थी। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई अन्य क्षेत्रीय छत्रप पहले से ही गठबंधन में अपनी अलग भूमिका और नेतृत्व की दावेदारी देख रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर निर्विवाद नेता के रूप में स्वीकार करना अन्य दलों के लिए बहुत मुश्किल है। केवल टीएमसी ही नहीं, बल्कि डीएमके (DMK) जैसी अन्य सहयोगी पार्टियों ने भी हाल ही में विपक्षी बैठकों से दूरी बनाई है, जो गठबंधन की एकजुटता पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

ममता ने 8 जून को बुलाई बैठक

8 जून को प्रस्तावित विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक से पहले ही सहयोगी दलों के बीच असहमति खुलकर सामने आने लगी है। बैठक को लेकर पहले द्रमुक (DMK) ने दूरी बनाने का फैसला किया, जिसके बाद गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद और स्पष्ट होते दिखाई दे रहे हैं। अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी कांग्रेस के नेतृत्व और उसके कामकाज के तरीके पर असंतोष जताया है। इन घटनाक्रमों ने विपक्षी एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं और बैठक से पहले राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार की घोषणा किए जाने के तरीके से सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) असहज नजर आ रही है। पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे पर सहयोगी दलों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

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