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मणिपुर के मुख्यमंत्री ने 6 महीने में पूर्ण शांति का वादा किया, कहा- इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं

August 31, 2024

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने 6 महीने में पूर्ण शांति का वादा किया, कहा- इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं

इंफाल: मणिपुर में जातीय हिंसा के धीरे-धीरे कम होने के बीच, राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने केंद्र की मदद से 6 महीने में पूर्ण शांति बहाल करने का वादा किया और साथ ही पद छोड़ने से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई अपराध किया है और न ही कोई घोटाला किया है। सिंह ने वीरवार को यहां एक साक्षात्कार के दौरान पहली बार खुलासा किया कि उन्होंने कुकी-जो और मेइती नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक दूत नियुक्त किया है। आधिकारिक गणना के अनुसार, मई 2023 से कुकी-जो और मेइती जातीय समूहों के बीच संघर्ष में 226 लोग मारे गए हैं। सिंह ने कहा, ‘इसे बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। संवाद ही एक मात्र रास्ता है।’ उन्होंने बताया कि नगा विधायक और ‘हिल एरिया कमेटी’ के अध्यक्ष डिंगांगलुंग गंगमेई को दूत नियुक्त किया गया है।

यह पूछे जाने पर कि शांति बहाल करने के वास्ते उन्होंने स्वयं के लिए क्या समय-सीमा तय की है, सिंह ने संकेत दिया कि शांति लाने में बातचीत के साथ-साथ केंद्र सरकार की भागीदारी अहम होगी, चाहे वह गृह मंत्रलय के माध्यम से हो या अन्य एजैंसी के माध्यम से। सिंह ने कहा, ‘मुङो नहीं लगता कि यह (हिंसा) लंबे समय तक जारी रहेगी। शांति 5-6 महीने में बहाल हो जानी चाहिए। यह हमारी उम्मीद है और मुङो पूरा भरोसा भी है।’ सिंह मेइती समुदाय से संबंध रखते हैं और कुकी समुदाय के लोग उन पर खास भरोसा नहीं करते। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जब वह आधिकारिक कुर्सी पर बैठे हैं तो वह नहीं चाहते कि उनकी पहचान मेइती के रूप में हो। उन्होंने कहा, ‘मैं सभी का मुख्यमंत्री हूं।’ सिंह ने अपने कार्यालय में साक्षात्कार के दौरान उपग्रह से लिए गए चित्र दिखाते हुए कहा कि 2001 में जिन क्षेत्रों में लोग नहीं रहते थे, वहां 15 साल बाद भारी आबादी रहती है।

उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें अवैध बस्तियों का सबूत हैं, जो राज्य की जनसांख्यिकी को बदल रही हैं। सिंह ने कहा कि मार्च 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट के फैसले में मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की सिफारिश की गई, जिससे कुकी लोगों का गुस्सा और बढ़ गया तथा उन्हें लगा कि उनके अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। बहरहाल, सिंह की सरकार ने अदालत के आदेश को लागू नहीं किया, लेकिन तब तक कुकी छात्र समूहों का आंदोलन शुरू हो चुका था और जल्द ही यह पूर्ण हिंला में बदल गया। इस साल फरवरी में हाईकोर्ट ने अपने आदेश से एसटी दज्रे वाला पैराग्राफ स्वयं वापस ले लिया।

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