Mann Ki Baat 139th episode Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती, पर्यावरण की सुरक्षा, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और देश के मेहनती लोगों के योगदान पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें देश के आम लोगों की मेहनत, हिम्मत और अच्छे कामों को करीब से जानने का मौका मिलता है।
पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब में प्राकृतिक तरीके से कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की संस्था जैविक और पारंपरिक खेती के तरीकों को दोबारा लोकप्रिय बनाने का काम कर रही है।
इस संस्था की टीम किसानों को प्राकृतिक तरीके से कपास उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस पहल को ‘नव-त्रिंजन’ नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल के कपास की खेती को बढ़ावा देना है।
‘नव-त्रिंजन’ पहल से पर्यावरण को होगा फायदा
पीएम मोदी ने बताया कि ‘नव-त्रिंजन’ पहल के तहत ऐसी कपास उगाई जा रही है, जिसमें रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके अलावा, प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है। इस कपास से धागे और कपड़े तैयार किए जाते हैं। प्राकृतिक रंगों वाली कपास का इस्तेमाल करने से कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की जरूरत कम हो सकती है। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की पहल न केवल खेती के पुराने तरीकों को नया जीवन देती है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय उत्पादों को मिल रही पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के स्थानीय उत्पादों को अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नए बाजार मिल रहे हैं। उन्होंने बिहार के मखाने और कर्नाटक की अरहर दाल का उदाहरण देते हुए बताया कि इन उत्पादों को दुनिया भर में पहचान मिल रही है। इससे किसानों और स्थानीय उत्पादकों को अपने सामान की बिक्री के नए अवसर मिल रहे हैं।
महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों और खादी की तारीफ
पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आकर्षक पैकेजिंग के जरिए इन उत्पादों को नई पहचान मिल रही है। इनकी पैकेजिंग में आदिवासी कला और संस्कृति की झलक दिखाई देती है। उन्होंने खादी की बढ़ती लोकप्रियता पर भी खुशी जताई। खादी की मांग बढ़ने से उन कारीगरों को मदद मिलती है, जो अपनी मेहनत और हुनर से भारत की पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे स्थानीय कारीगरों और छोटे उत्पादकों द्वारा बनाए गए सामान को खरीदें। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और देश की पारंपरिक कला को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
‘मन की बात’ मेरे लिए तीर्थयात्रा जैसा अनुभव: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने के सफर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी। तब से यह कार्यक्रम लगातार जारी है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस सफर में देश की जनता उनके साथ रही है। लोगों ने न केवल इस कार्यक्रम को अपना प्यार दिया, बल्कि उन्हें कई अच्छे कामों और प्रेरणादायक कहानियों से भी परिचित कराया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देश के आम लोगों की मेहनत, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने का एक खास मंच है।
आम लोगों के अच्छे कामों को सामने लाने का मंच
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। उनके लिए ‘मन की बात’ भी एक तीर्थयात्रा की तरह है, जिसके माध्यम से वह देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के प्रयासों को समझ पाते हैं। इस कार्यक्रम के जरिए उन लोगों की कहानियां सामने आती हैं, जो समाज की भलाई, पर्यावरण की सुरक्षा, खेती में सुधार और देश की परंपराओं को बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों के योगदान को पहचानना और उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है।
लोगों से स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों को खरीदने और इस्तेमाल करने को प्राथमिकता दें। इससे किसानों, कारीगरों, छोटे कारोबारियों और स्थानीय उत्पादकों को आर्थिक मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने देश में बने सामान को अपनाते हैं, तो इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलता है और भारत की पारंपरिक कला, संस्कृति और हुनर को नई पहचान मिलती है।

