इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio द्वारा वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा की घोषणा किए जाने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के बाद अब माकपा नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
ब्रिटास ने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति और संप्रभुता के मामलों में अमेरिका का बढ़ता हस्तक्षेप चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के नेता की भारत यात्रा की घोषणा भारत सरकार की बजाय अमेरिका के विदेश मंत्री द्वारा किया जाना बेहद असामान्य है।
राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कल को अमेरिका के विदेश मंत्री या अमेरिकी राष्ट्रपति यह भी तय कर सकते हैं कि भारत सरकार में कौन मंत्री बनेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर भविष्य में कैबिनेट विस्तार या फेरबदल हो और उसकी सूची पहले मार्को रुबियो जारी कर दें, तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। यह देश के लिए बेहद दुखद स्थिति है।
ये भी पढ़ें: Twisha Sharma case: परिजनों ने कहा-समर्थ के परिवार को माफिया का समर्थन, फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई
भारत की कूटनीतिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
ब्रिटास ने कहा कि भारत एक संप्रभु और लोकतांत्रिक देश है, जहां 140 करोड़ लोग रहते हैं। ऐसे देश को यह फैसला खुद करना चाहिए कि उसे किस देश के नेता को बुलाना है और किससे संबंध मजबूत करने हैं। भारत के इतिहास में किसी भी सरकार के दौरान विदेश नीति को लेकर ऐसा व्यवहार पहले कभी नहीं देखा गया। अब ऐसा लगने लगा है कि अमेरिका भारत के कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने भारत दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज तेल और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए भारत आने वाली हैं। रुबियो के इस बयान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि भारत और वेनेजुएला के बीच होने वाली किसी आधिकारिक यात्रा की घोषणा भारत सरकार या वेनेजुएला की सरकार की ओर से होनी चाहिए थी, न कि किसी तीसरे देश के विदेश मंत्री की तरफ से।
विपक्ष ने केंद्र से मांगा जवाब
विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता से जुड़ा मुद्दा है। विपक्ष अब केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांग रहा है।
ये भी पढ़ें: देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार, सप्लाई पूरी तरह सामान्य: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन

