
Markanda in spate, water in many villages : कुरुक्षेत्र। मानसून की पहली तेज बारिश ने ही मारकंडा नदी के किनारे बसे गांवों की चिंता बढ़ा दी है। नदी में जलस्तर 15 हजार क्यूसेक पार होते ही कलसाना, कठुआ और टंगौर समेत कई गांवों में पानी घुस गया।
गलियां जलमग्न हो गई हैं, जबकि खेतों में पानी भरने से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल पर खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। हर साल 1500 क्यूसेक के आसपास ही इन गांवों में खतरे की स्थिति बनने लगती है, लेकिन इस बार पहली ही बारिश में हालात गंभीर हो गए हैं। शनिवार को कठुआ, टंगौर और कलसाना गांव की गलियों में डेढ़ से 2 फीट तक पानी भर गया है, थिस कारण ग्रामीणों को आने-जाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है पानी घरों में भी घुस गया है और लोग घरों से पानी निकालने में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि मारकंडा नदी का उफान क्षेत्र के किसानों के लिए नया संकट नहीं है। पिछले वर्ष भी भारी बारिश के बाद मारकंडा में आए तेज बहाव ने शाहबाद क्षेत्र के करीब 10 गांवों में भारी तबाही मचाई थी। नदी का पानी खेतों में घुसने से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी। धान, चारा और अन्य फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई थीं, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। कई दिनों तक खेतों में पानी भरा रहने के कारण भूमि की उर्वरता भी प्रभावित हुई थी और अगली फसल की बुवाई पर भी असर पड़ा था।
उस समय ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते हुए जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने, तटबंधों को ऊंचा करने और मारकंडा नदी के किनारों को सुरक्षित बनाने की मांग उठाई थी। किसानों का कहना था कि हर वर्ष बरसात के मौसम में उन्हें इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इस मुद्दे को शाहबाद से कांग्रेस विधायक रामकरण काला ने हरियाणा विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने सरकार से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, फसल नुकसान का विशेष गिरदावरी सर्वे कराने और मारकंडा नदी के बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की मांग की थी। विधायक ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हर मानसून में हजारों किसानों को इसी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस वर्ष भी मारकंडा का जलस्तर बढ़ने के साथ कलसाना, कठुआ, टंगौर सहित कई गांवों में पानी घुसने से पिछले साल जैसी स्थिति बनने लगी है। खेतों में पानी भरने से किसानों की खड़ी फसल प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों में एक बार फिर बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसान प्रशासन से तत्काल राहत, जल निकासी और फसल नुकसान के आकलन की मांग कर रहे हैं, ताकि समय रहते उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।
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